Saturday, December 24, 2016

क्रिसमस 25 दिसंबर को क्यों मनाते हैं ?

क्रिसमस :

         क्रिसमस का त्योहार प्रतिवर्ष अंग्रेजी महीने के अनुसार दिसंबर की 25 तारीख को मनाया जाता है | प्रभु ईसा मसीह का जन्म इसी सुभ तिथि में हुआ था | ईसा मसीह ऊँच- नीच के भेदभाव को नहीं मनाते थे | अत: क्रिसमस का पावन पर्व भी किसी एक का नहीं अपितु उन सभी का है जो उनके समर्थक हैं तथा उन पर आस्था रखते हैं | हालांकि क्रिसमस को ईसा मसीह के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है लेकिन ईसाई विद्वान इस बात पर लगभग एकमत हैं की ईसा के जन्म का वास्तविक दिन यह नहीं है | प्रभु यीशु के जन्मदिन के मौके पर आज भारत समेत पूरी दुनिया में क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है |


         इस त्योहार पर क्रिसमस-ट्री सजाने का विशेष महत्व है | यूरोपीय देशों में तो इसकी सजावट व भव्यता देखते ही बनती है | भारत में भी इसके महत्व को अब विस्तृत रूप से देखा जा सकता है | परिवार के सभी सदस्य इस दिन क्रिसमस ट्री के चारों और एकत्रित होते हैं | सभी मिलकर प्रभु ईसा समीह का स्तुतिगान तथा प्रार्थना करते है | 24 दिसंबर की रात से ही नवयुवकों की टोली जिन्हें कैरल्स कहा जाता है यीशु मसीह के जन्म संबंधी गीतों को प्रत्येक मसीही के घर में जाकर गाते हैं | इसी रात को गिरिजाघरों में प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित झांकियां भी सजाई जाती है | इस अवसर पर ईसाई धर्मावलंबी बड़ी संख्या में गिरजाघरों में एकत्रित होकर एक-दुसरे को प्रभु के जन्म की बधाई देते हैं | रात में से ही हैप्पी क्रिसमस-मेरी क्रिसमस से बधाइयों का सिलसिला जारी है | देश के सभी शहरों में लोगों ने क्रिसमस ट्री सजाया जाता है और सांता दूसरों को उपहार देकर जीवन में देने का सुख हासिल करने का संदेश दे रहे हैं | इस अवसर पर ईसाई अपने घरों को बहुत ही आकर्षक ढंग से सजाते है और विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर पड़ोसियों को भेंट करते हैं तथा खुद भी खाते हैं | बच्चों के लिए शंताक्लाज कोई न कोई उपहार अवश्य लाता है क्योंकि ईसा मसीह स्वयं बच्चों से बहुत स्नेह रखते थे | क्रिसमस ईसाइयों का प्रमुख त्योहार है | ईसाई समुदाय के लिए इस त्योहार का वही महत्व है जो हिंदुओं के लिए दशरह तथा दीपावली का है | यह त्योहार विश्वभर में फैले ईसा मसीह के करोड़ों अनुयायियों के लिए पवित्रता का संदेश लाता है तथा उनके बताए हुए मार्गो व उच्च आदर्शो पर चलने हेतु प्रेरित करता है |

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क्रिसमस का त्योहार भारत में सभी समुदायों आनंद उठाने लगे है जिससे सामाजिक सदभाव की अभिवृदधि होती है | सभी समुदायों के लोग एक-दुसरे को क्रिसमस की सुभकामनाएँ देते हैं | ईसा मसीह को परमेश्वर का दूत माना जाता है | वे संसार के दिन-दुनियों का दु:ख दूर करने तथा ईश्वर के वास्तविक स्वरुप को दूसरों के समक्ष प्रकट करने हेतु अवतरित हुए थे | प्रारंभ में उन्हें अनेक कठिनाइयाँ आई परंतु बाद में धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी | उन्हेंने अपने उपदेशों के माध्यम से संसार में व्याप्त अंधविश्वास, अज्ञानता, दुःख आदि को दूर करने का प्रयास किया | यह त्योहार सभी हदयों को पवित्रता के भाव से ओत-प्रोत करता है और हमें प्रेरित करता है कि अनेक कठिनाइयों का सामना करने पर भी हमें सन्मार्ग का त्याग नहीं करना चाहिए तथा दुसरों को भी पवित्रता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए यथासंभव सहयोग करना चाहिए |

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Sunday, December 18, 2016

सौ वे आर्टिकल की जानकारी कैसी है ?

 सौ वे आर्टिकल  :

      सभी मित्र को बताते हुए हेल्थ के बारे में 100 वे आर्टिकल जंगलटिप्स ब्लोग में लिखा हुवा है |यह आर्टिकल की अधिक जानकारी निचे दिया हुवा है ।





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  सौ वे आर्टिकल बहुत बहुत सभी को सुभकामनाएँ 

Saturday, December 10, 2016

ठंड में बुजुर्गो और नवजात शिशु को देखभाल कैसे करे !

बुजुर्गो और नवजात शिशु :

          सर्दिया शुरू हो गई हैं मौसम के बदलने का सबसे ज्यादा छोटे बच्चों पर असर पड़ता है | सर्दी जुकाम और गले में इंफेक्शन छोटे बच्चों को ये परेशानियां सबसे ज्यादा होती है | और कई बार तो हल्का बुखार बढ़कर निमोनिया का रूप ले लेता है | ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरुरी होता है | मौसम में हर उम्र के लोगों को देखभाल की आवश्यकता होती है लेकिन बच्चों और बुजुर्गो को ऐसे मौसम में खास देखभाल की आवश्यकता होती है | क्योंकि उनकी प्रतिरोधी क्षमता कमजोर होती है | ऐसे में सबसे ज्यादा डर उच्च रक्तचाप या ब्लड प्रेशर के मरीजों को रहता है | आइये जानें अधिक उम्र या नवजात शिशु का ख्याल कैसे रखनी चाहिए |


          यह बात हम सभी जानते है की दुनिया में सबसे अनमोल रिश्ता माँ और शिशु का होता है | यह रिश्ता प्रेम और स्नेह का प्रतिक होता है | और ऐसा हो भी क्यों ना 9 महिना तक कोख में पालने और असहनीय प्रसव पीड़ा सहने के बाद माँ के गोद में बच्चे की किलकारियां गूंजती है | इससे ना केवल माँ की बल्कि पुरे परिवार की ख़ुशी दोगुनी हो जाती है | जब भी कोई स्त्री पहली बार माँ बनती है तो खुशियों के साथ साथ उसके सामने कई तरह की चुनौती भी होती है | पहली बार शिशु को जन्म देने वाली माताओं को यह पता नहीं होता की उन्हें अपने बच्चे की देखभाल कैसे करनी है | क्योंकि यह उसके लिए बिलकुल नया अनुभव होता है | बच्चों की देखभाल को लेकर नयी माँ के दिमाग में कई प्रकार की शंकाएं या सवाल उत्सुकता होती है | मौसम बदलने का सीधा असर उन पर पड़ता है उनमे से बुजुर्ग तो अपनी तकलीफ बता व समझा कर निदान कर सकते है पर छोटे बच्चे के लिए यह बिलकुल मुश्किल है | ऐसे में छोटे बच्चों की ठंड में बेहतर देखभाल की जरुरत होती है | विशेषज्ञ बताते हैं की अचानक मौसम परिवर्तन का असर सभी पर होता और इससे छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते है | सर्दी जुकाम और गले में इन्फेक्शन के अलावा छोटे बच्चों को परेशानियाँ सबसे ज्यादा होती है |

नवजात बच्चों की देखभाल कैसे करे-

          नवजात शिशु के लिए उसकी माँ का दूध ही सर्वोत्तम होता है | इसलिए माँ को बच्चे को तब तक दूध पिलाना चाहिए जब तक बच्चा पूरी तरह से संतुष्ट न हो जाए | बच्चे को उठाते समय एक हाथ को सर और गर्दन के निचे और दूसरे हाथ को पैर के निचे रखें | बच्चे के सिर और गर्दन को इस तरह पकडे की इन्हें पूरा सपोर्ट मिले | नवजात को हमेशा नर्म और गर्म कपडे में लपेटकर रखना चाहिए | इससे आपका बच्चा काफी सुरक्षित महसूस करता है | बच्चे को वातावरण के बदलाव का ज्यादा असर ना पड़े इसके लिए 0-2 महिना तक शिशु को जरुर लपेटकर रखनी चाहिए | बच्चों की मालिश करने से उनका शारीरिक विकाश होता है | लेकिन बच्चे की मालिश सावधानीपूर्ण की जानी चाहिए | मालिश के लिए जैतून, बादाम या बेबी ऑइल इस्तेमाल कर सकते है | लेकिन मालिश को हमेशा हलके हाथो से करनी चाहिए |

  • बाहर ज्यादा ठंड होने पर बच्चों को इनडोर गेम्स खेलने को प्रेरित करनी चाहिए | बच्चों में ज्यादा दिन तक रहने वाला सर्दी जुकाम निमोनिया भी हो सकता है | शिशु के सर व पैर हमेशा ढक कर रखना चाहिए 
  • नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधी क्षमता बनाये रखने के लिए उसे स्तनपान कराना चाहिए | अपने शिशु का टीकाकरण समय पर करायें जिससे वो कई संक्रामक बिमारियों के खतरे से दूर रहे | 
  • अपने चिकित्सक से समय-समय पर मिलते रहे | समय-समय पर ब्लड प्रेशर नापते रहें और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखे | सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने का एक कारण होता है रक्त वाहिकाओं का संकुचित हो जाना जिससे हदय पर दबाव पड़ता है |
  • सरदर्द, घबराहट, आँखों में भारीपन महसूस होने पर चिकित्सक से मिले | खाने में तेल, घी कम से कम खाये और रोज व्यायाम करना चाहिए |
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Monday, November 28, 2016

ठंडी से बचने के कुछ नुस्खे और घरेलु उपचार कैसे करे !

ठंड से बचने का नुस्खे :

         ठंड से बचने के लिए लोग गरम कपडे पहनते है और आलाप ( आग ) जलाते है | ठंड के असर से बचने के लिए शरीर का बाहर के साथ साथ अंदर से भी गरम रहना जरुरी है | अगर हमारा शरीर मौसम के अनुसार खुद को अंदर से ढाल ले तो हमें ना ज्यादा गर्मी लगेगी और ना ज्यादा ठंड लगेगी जिससे हम मौसमी बीमारियों और इन्फेक्शन से भी दूर रहेंगे | बाहर का तापमान होने पर शरीर का तापमान बढ़ सकता है | सर्दी के मौसम में खुद को कैसे वायरस के हमले से बचाएं | सर्दियों में टोपी, मफलर और दस्ताने पहनना आज कल फैशन सा बन गया है | कुछ लोग तो साल भर इसी इंतजार में रहते हैं की कब मौसम ठंडा हो और कब रंग बिरंगे मफलर का इस्तेमाल हो और सर्दी से बचाने में मफलर बहुत फायदेमंद होता है |


         हमारे शरीर का औसत तापमान 98.6 डिग्री फ़ॉरेनहाइट कम या ज्यादा भी हो सकता है | महिलाओं को अमूमल ज्यादा ठंड लगती है क्योंकि उनकी शारीरिक बनावट ही कुछ इस तरह की होती है | पर अगर आप बहुत ज्यादा ठंड लगने की समस्या से लंबे समय से पीड़ित हैं तो आपको डॉक्टर के पास जाकर अपनी समस्या का मूल कारण जल्द तलाशना करनी चाहिए | कुछ ऐसी चीजें हैं जो इस परेशानी की वजह हो सकती है | शरीर में आयरन की कमी  लगातार लगने वाली ठंड की प्रमुख वजह हो सकती है | अब तक अगर आप इस समस्या को सिर्फ कमजोरी थकान या त्वचा के पीलेपन से जोड़ रहे थे तो आप गलत है | पुरे शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन पहुँचाने के अलावा शरीर के विभिन्न हिस्सों से गर्मी और पोषक तत्वों को लाने पहुचाने में आयरन की अहम् भूमिका होती है | शरीर में आयरन की कमी का सीधा मतलब यह है की शरीर अपने ये सभी काम सुचारू रूप से कर पाने में सफल नहीं हो पाएगा | आयरन की इस कमी के कारण आपको कंपकपी भी शुरू हो सकती है | ठंड धीरे-धीरे रफ़्तार पकड़ने लगी है | इस मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही बच्चों के लिए भरी पद सकती है | सर्दी-जुखाम से जो सिलसिला लापरवाही की वजह से शुरू होता है वो न्युमोनिया और परमानेंट अस्थमा जा पहुचता है | इसलिए मौसम में बच्चों को लेकर खास सावधानियां बरतने की जरुरत है | विटामिन B 12 की खास बात यह है की यह जानवरों से प्राप्त होने वाली खाद्य पदार्थो में पाया जाता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में अहम् भूमिका निभाता है | शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने का काम विटामिन B 12 ही करता है | इस विटामिन की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं पुरे शरीर में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पातीं और परिणामस्वरूप लगातार ठंड लगती रहती है |

इन्हें अपनाएं और ठंड भगाएं  -

  • शरीर को कई प्रकार शहद रोगों से दूर रखता है और जरुरत पड़ने से बिमारियों के उपचार में भी सहायत है इसलिए शहद को आयुर्वेद में अमृत सामान माना गया है | सर्दियों में शहद का सेवन करने से शरीर का इम्यून सिस्टम दरुरत रहता है और साथ ही पाचन क्रिया भी बढती है | 
  • अपने आहार में फल, सूखे मेवे और स्प्राउटस शामिल करें | तरल पधार्थो का सेवन ज्यादा करें | जंक फ़ूड से दूर रहें | गेहूं की घास से बने जूस के नियमित सेवन से भी लाभ होता है | तिल, अश्वगंधा और सरसों के तेल से मालिश करें | गर्म पानी के स्नान से भी लाभ मिलता है |
  • सर्दियों में cold cough से राहत पाने में सूप का सेवन काफी फायदेमंद है | आप वेज और नॉन वेजिटेरियन कोई भी सूप बस इतना ध्यान रहे की ये ताजा हो | लौंग, तुलसी,काली मिर्च और अदरक की बनी हुई चाय पिने से ठंड से राहत मिलती है | खाँसी और सर्दी जुकाम से छुटकारा पाने में भी ये उपाय असरदार है | 
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Friday, November 18, 2016

स्वास्थ्य के महत्व और तंदरुस्त कैसे बनाएं रखनी चाहिए !

स्वास्थ्य और तंदरुस्त :

         मनुष्य के जीवन में स्वास्थ्य का सर्वाधिक महत्व है | स्वास्थ्य के बिना धन, संपत्ति, मनोरंजन, और अन्य सुविधाएँ महत्व हीन हैं | जो व्यक्ति तन और मन से स्वास्थ्य होता है वह संसार का सबसे सुखी प्राणी है | ऋषि मुनियों ने शुरू से ही स्वास्थ्य के महत्व को स्वीकार किया है और स्वस्थ बने रहने के लिए प्रकृति के नियमों का पालन करने की सलाह दिन है | जो मनुष्य सूर्योदय से पूर्व उठते हैं और अपनी दिनचर्या पूर्ण करके निर्धारित समय के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करते है निष्काम भाव से कर्म करते है तथा रात्रि में समय पर शयन करते हैं वे हमेशा स्वस्थ बने रहते हैं |


        स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को बनाए रखना एक व्यक्ति को स्वस्थ और अच्छाई की सामान्य स्थिति में रहने में मदद करता है | यह बिना आराम के शारीरिक गतिविधियों को करने की क्षमता प्रदान करता है | यद्यपि, स्वास्थ्य और तंदुरस्ती को बनाए रखने के लिए सन्तुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक व्यायाम की आवश्यकता होती है | तंदुरस्त,स्वस्थ,बिमारियों से निडर रहने और अन्य बहुत से लाभों के लिए अपने स्वास्थ्य और तंदुरस्त को बनाए रखना बहुत आवश्यक है | स्वास्थ्य और तंदुरस्ती उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो बहुत ख़ुशी और शांति के साथ जीवन जीना चाहते हैं | एक स्वस्थ और तंदुरस्त व्यक्ति ही पुरे उत्साह के साथ जीवन जीने में सक्षम होता है | हम एक व्यक्ति को स्वस्थ और तंदुरस्त तब कह सकते है यदि वह शारीरिक और मानसिक रूप से तंदुरस्त है | शारीरिक और मानसिक रूप से तंदुरस्त व्यक्ति को बिमारियों का खतरा कम रहता है | किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य और तंदुरस्ती निम्नलिखित चीजों में मदद करती है |
         आजकल लोग अपने व्यस्त जीवन-शैली में बहुत व्यस्त हो गए हैं और उनके पास स्वस्थ या तंदुरस्त रखने का भी समय नहीं है | यह सत्य है की हमें स्वस्थ और दंदुरस्त रहने के लिए स्वास्थ्यवर्धक खाना चाहिए, अपने आस-पास स्वच्छता रखने का अभ्यास करना चाहिए और नियमित शारीरिक व्यायाम करना चाहिए | जैसे की हम सभी जानते हैं की कठोर परिश्रम का कोई भी विकल्प नहीं है इसी तरह स्वास्थ्य और तंदुरस्ती रहने का भी कोई अन्य विकल्प नहीं है | स्वास्थ्य और तंदुरस्ती स्वस्थ रहन-सहन और स्वस्थ जीवन- शैली का मिश्रण है | हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए नियमित स्वास्थ्यवर्धक भोजन करना चाहिए और शारीरिक व्यायाम करना चाहिए हालांकि, हमें मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सकारात्मक सोचने की आवश्यकता होती है | स्वास्थ्यकर बिंदुओं का ध्यान रखने के लिए उसके भौतिक एवं आध्यात्मिक प्रभावों पर बल दिया गया है | धर्म में गहरी आस्था रखने वालों को स्वास्थ्यकर से संबंधित गतिविधियों के ली प्रोत्साहित करने के लिए इतना बताना काफी होगा की इससे ईश्वर का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है और उसकी अनुकंपाओं का पात्र बना जा सकता है | कुराने मजीद में साफ एवं स्वच्छ जैसे शब्दों का अनेक स्थानों पर प्रयोग है जिससे इस्लामी शिक्षाओं में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के महत्व का पता चलता है | क्योंकि शरीर मन का आधार होता है उसके स्वास्थ्य का इंसान के मन पर सीधा प्रभाव पड़ता है इसीलिए इस्लाम की अनेक शिक्षाओं में की जो दिशानिर्देशों के रूप में हैं शरीर के स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्यकर पर काफी ध्यान दिया गया है |

    स्वास्थ्य और तंदरुस्ती का महत्व -

  • स्वंय के स्वस्थ और तंदरुस्त रखने के लिए हम नियमित से निम्नलिखित तरीकों अपना सकते है | हमें अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर नियमित रूप से दैनिक शारीरिक व्यायाम में शामिल होना चाहिए | 
  • स्वंय को व्यायाम 30-60 मिनट का या सप्ताह में 5 से 6 बार व्यायाम किसी भी व्यक्ति के तंदरुस्त रहने के लिए पर्याप्त है | एक व्यक्ति के लिए सही समय पर सही मात्रा में स्वच्छ आहार स्वस्थ और तंदरुस्त रहने के लिए बहुत आवश्यक है | 
  • तंदरुस्त और स्वस्थ रहने के लिए, सोने की अच्छी व्यवस्था किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत आवश्यक है | स्वस्थ पोषण के साथ उच्च फाइबर, कम वसा, अधिक प्रोटीन और विटामिन व मिनरल के स्रोत अच्छे स्वास्थ्य के नींव है | 
  • बीमारियों के खतरे को कम करना | शारीरिक और मानसिक रूप से बेहतर महसूस कराना | आत्मविश्वास के स्टार को सुधारना | जीवन में सालों को जोड़कर आयु को लम्बी करने में मदद करना | तनाव को कम करना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना | तनाव का स्तर चिन्ता और अवसाद की भावना को कम करना |
  • सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए विशेषरूप से युवा पीढ़ी से लिए नियमित शारीरिक गतिविधियों और नियमित व्यायाम आवश्यक है | स्वास्थ्य और तंदरुस्ती जीवन में खुशियाँ लाती है और एक व्यक्ति की तनावमुक्त और बीमारी मुक्त जीवन जीने में मदद करती है | 
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Friday, November 11, 2016

लहसुन खाने से फायदेमंद क्या है !

लहसुन के फायदे :

        लहसुन आयुर्वेद में कहा जाता है की इसके सेवन करने से आप जवान बने रहेगे | साथ ही यह कई बिमारियों से जैसे की बवासीर, कब्ज, कान का दर्द, ब्लड प्रेशर, भूख बढ़ाने आदि में किया जाता है | लहसुन का इस्तेमाल हम खाने का स्वाद बढ़ाने में किया जाता है | इसके इस्तेमाल से खाना का टेस्ट बदल जाता है | लेकिन आप जानते है की लहसुन की एक कलि हमारे शरीर को कई बीमारियों से बचाता है | आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढाता है बल्कि आपके सेहत का भी ख्याल रखता है |


        लहसुन और शहद एक बहुत ही पुरानी दवा है | खाली पेट लहसुन खाने से होते है यह चमत्कारी फायदे अगर इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है तो इंसान को सौ तरह की बीमारियाँ घेर लिती हैं | क्या आप जानते है की लहसुन और शहद को एक साथ मिला कर खाने से ये एंटीबायोटिक का काम करते हैं | यह एक प्रकार का सूपर फूड है | लहसुन पेट संबंधी समस्याओं के लिए काफी फायदेमंद है | साथ ही इसका सेवन करने से आपके पेट में मौजूद विषाक्त पधार्थो को साफ़ कर देता है | शुक्राणु बढाने में कैसे मददगार गरम दूध और शहद हमेशा कच्चे और शुद्ध शहद का ही प्रयोग करें क्योंकि यह कोलेस्ट्रोल को कम करने का मदद करता है | साथ ही इसे खाने से वजन भी कम होता है | लहसुन और शहद के इम्युनिटी बढाए इस धोल की शक्ति बढ़ जाती है और फिर यह इम्यून सिस्टम को मजबूत कर देता है | इम्यून सिस्टम मजबूत होने से शरीर मौसम की मार से बजा रहता है और उसे कोई बिमारी नहीं होती | दिल की सुरक्षा करे इस मिश्रण को खाने से हदय तक जाने वाली धमनियों में जमा वसा निकल जाता है जिससे खून का प्रवाह ठीक प्रकार से हदय तक पहुंच पाटा है | इससे हदय की सुरक्षा होती है | लहसुन खाने से गले की खराश दूर करे इस मिश्रण को लेने से गले का संक्रमण दूर होता है क्योंकि इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण हैं | यह गले की खराश और सुजन को कम करता है | डयरिया से बचाए अगर किसी को डायरिया हो रहा हो तो उसे इसका मिश्रण खिलाएं | इससे उसका पाचन तंत्र दुरुस्त हो जाएगा और पेट के संक्रमण मर जाएंगे | सर्दी-जुखाम से राहत दिलाए इसको खाने से सर्दी-जुखाम के साथ साइनस की तकलीफ भी काफी कम हो जाती है | यह मिश्रण शरीर की गर्मी बढ़ता है और बीमारियों को दूर रखता है | यह फंगल इंफेक्शन से बचाए फंगल इंफेक्शन, शरीर के कई भागों पर हमला करते है लेकिन एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरा यह मिश्रण बैक्टीरिया को ख़तम कर के शरीर को बचाता है |

कच्ची लहसुन खाने के लाभ -

  • लहसुन यह गले की खराश और सुजन को कम करता है | लहसुन को मिश्रण लेने का संक्रमण दूर होता है क्योकिं इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण रहते है | लहसुन और शहद के मेल से इस घोल की शक्ति बढ़ जाती है और फिर यह इम्यून सिस्टम को मजबूत कर देता है | इम्यून सिस्टम मजबूत होने से शरीर मौसम की मार से बचा रहता है और उसे कोई बिमारी नहीं होती है |
  • लहसुन को खाने से सर्दी-जुखाम के साथ साइनस की तकलीफ कम हो जाती है | यह मिश्रण शरीर की गर्मी बढाता है और बीमारियों को दूर रखता है | इस मिश्रण को खाने से हदय तक जाने वाली धमनियों में जमा वसा निकल जाता है जिससे खून का प्रवाह ठीक प्रकार से हदय तक पहुंच जाता है | इससे हदय की सुरक्षा होती है |  
  • लहसुन को शुद्ध और बिना गर्म किया शहद यौन उत्तेजना बढाता है क्योंकि इसमें अनेक पदार्थ जैसे, जिंक, विटामिन ई आदि होता है | यह पौरुष और प्रजनन स्वास्थ्य को बढावा देने का कार्य करता है | इसके अलावा रात को रोज सोते वक्त शहद पिसा लहसुन एक साथ मिक्स कर के खाना चाहिये | यह एक आपके सेक्युअल स्टैमिना और प्लेजर को बढ़ा देता है | 
  • लहसुन शायद वनस्पति जात की यह इकलौती वनस्पति है जिसमे सभी विटामिन और खनिज है | इसलिए लहसुन बालो के लिए भी फायदेमंद है | केवल लहसुन का सेवन ही नहीं बल्कि इसके तेल से भी बालो से जुडी सारी समस्याओं से निजात पाई जा सकती है |  बाल झड़ना - 50 ग्राम  सरसों का तेल, एक लहसुन की सब कलिया छीलकर डाल दे | मंदाग्री में पकाएं | कलिया जल जाए तो उतारकर छानकर बोतल में भर दें | रोज रात को सोने से पहले मालिश करे |
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Tuesday, November 1, 2016

वनस्पति में नीम के फायदे क्या क्या है ?

नीम के फायदे :

         वनस्पतियों में से निम् एक ऐसी वनस्पति है जो सूर्य के प्रतिबिम्ब की तरह है | यह अपने औशधिय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार पांच हजारो सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है | नीम में इतने गुण हैं की ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है | यहाँ तक की इसको भारत में गाँव का दवाखाना कहा जाता है | इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है | नीम के पत्ते भारत से बाहर 34 देशों को निर्यात किए जाते हैं | इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली वगेरे को दूर करने में मदद करते है |


        इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य की शक्ति से ही चलता है | सूर्य की उर्जा से जन्म तमाम जीवों में नीम ने ही उस उर्जा को सबसे ज्यादा ग्रहण किया है | किसी भी बिमारी के लिए नीम आयुर्वेदि उपयोग किया जाता है | इस धरती पर मिलने वाले पत्तों में सबसे जटिल नीम का पत्ता ही है | नीम के पत्तों में जबरदस्त औशधिय गुण होता है | इसमें प्राणिक शक्ति भी बहुत अधिक है | अब वे नीम उगाने की कोशिश कर रहे है क्योंकि नीम को अनगिनत तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है | अगर आपको दांत का दर्द है इसकी दातून का इस्तेमाल किया जाता है | अगर आपको कोई छूत की बीमारी है तो नीम के पत्तों पर लिटाया जाता है क्योंकि यह सिस्टम को साफ़ कर के उसको उर्जा से भर देता है | अगर आपके घर के पास कोई नीम का पेड़ है तो इसका आपके ऊपर कई तरह से अच्छा प्रभाव पड़ता है | अगर आप हर दिन नीम का सेवन करें तो ऐसा हो सकता है इसको कैंसर वाली कोशिकाओं की तादाद एक सीमा के अंदर रहती है ताकि वह हमारी प्रणाली पर हल्ला बोलने के लिए एकजुट न  हो सकें | इसलिए नीम का सेवन बहुत लाभदायक है | नीम में ऐसी भी क्षमता है की अगर आपकी रक्त धमनियों में कहीं कुछ जमना शुरू हो गया हो तो ये उसको साफ़ कर सकती है | नीम का तरह- तरह से इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया के साथ निपटने में आपके शरीर की उर्जा खर्च नहीं होती | आप नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें फिर उसको पानी से धो डालें | सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ़ हो सकता है |

       नीम के औषधिय गुणों क्या है

  • बैक्टीरिया से भरी पड़ी है | हमारा शरीर बैक्टीरिया से भरा हुवा है | एक सामान्य आकार के शरीर में लगभग दस खरब कोशिकाएँ होती है | और सौ खरब से भी ज्यादा बैक्टीरिया होती है | आप एक है तो वे दस है | आपके भीतर इतने सारे जीव हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते है | इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं | इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो हमारे लिए मुसीबत खडी कर सकते है | अगर आप नीम का सेवन करते है तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है | 
  • बिमारियों के लिए नीम के बहुत से अविश्वसनीय लाभ है | सबसे खास यह है की कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है | हर किसी के शारीर में कैंसर वाली कोशिकाएं होती है | यह एक जगह नहीं होतीं हर जगह बिखरी होती हैं | किसी वजह से अगर आपके शरीर में कुंछ खास हालात बन जाते है तो ये कोशिकाएं एकजुट हो जाती हैं |
  • नीम आपके सिस्टम को साफ़ रखने के साथ उसको खोलने में भी खास तौर से लाभकारी होती है | इस सबसे बढ़ कर यह शरीर में गर्मी पैदा करता है शरीर में इस तरह की गर्मी हमारे अन्दर साधना के द्वारा तीव्र और प्रचंड उर्जा पैदा करने में बहुत मदद करती है |
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