Thursday, October 27, 2016

दीपावली कब और क्यों मनाया जाता है !

दीपावली का त्यौहार :

         यह दीवावली हिन्दुओं का बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है | दीपावली हिंदू कैलेंडर के अनुसार दीवाली अश्विन के महीने में कृष्ण पक्ष की १३ वें चंद्र दिन पर मनाया जाता है | यह परम्परागत रूप से हर साल मध्य अक्टूबर या नवम्बर में दशहरा के १८ दिन बाद मनाया जाता है | यह बात तो सभी को मालूम है की दीपावली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है भगवान राम जब असुरराज रावण को मारकर अयोध्या नगरी वापस आए तब नगरवासियों ने अयोध्या को साफ़-सुथरा करके रात को दीपकों की ज्योति से जलाया था | दीपावली का त्यौहार हर साल बहुत खुशियों के साथ आता है | दीपावली पाँच दिनों से अधिक समय धनतेरस से भाई-दूज पर पूरा होता है | कुछ स्थानों पर जैसे की महाराष्ट्र में यह छह दिनों में पूरा होता है | अधिक जानने के लिए निचे दिया हुवा है |
         भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्योहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों द्रष्टि से अत्यधिक महत्त्व है | इसे दीपोत्सव भी कहते हैं | तमसो माँ ज्योतिर्गमय अर्थात अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए यह उपनिषदों की आज्ञा है | इसे सिख, बौद्रतथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं | जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते है | माना जाता है की दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौद वर्ष के वनवास के पश्चात् लौटे थे | अयोध्यावासियों का हदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था | श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाये थे | कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमग उठी थी | तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाया जाता है | दीपावली दीपों का त्यौहार है | भारतियों का विश्वास है की सत्य की सदा जीत होती है और झूठ का नाश होता है | दीवाली एक धार्मिक विविध रंगों के प्रयोग से रंगोली सजाने, प्रकाश और ख़ुशी का अंधकार हटाने का मिठाइयों का पूजा आदि का त्यौहार है जो पुरे भारत के साथ साथ देश के बाहर भी कई स्थानों पर मनाया जाता है | यह रौशनी की कतार या प्रकाश का त्यौहार कहा जाता है | सम्पूर्ण विश्व में मुख्य: हिन्दुओं और जैनियों द्वारा मनाया जाता है | उस दिन बहुत से देशों जैसे टोबागो, सिंगापुर, सुरिनम नेपाल, मारीशस,गुयाना त्रिनद और श्री लंका, म्यांमार, मलेशिया और फिजी में राष्ट्रीय अवकाश है |
         दिवाली का त्यौहार वर्ष का सबसे सुंदर और शांतिपूर्ण समय लाता है जो मनुष्य के जीवन में असली ख़ुशी के पल प्रदान करता है | भगवान की पूजा और त्योहरोत्सव हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है हमें अच्छे कार्यों को करने के प्रयासों के लिए शक्ति देता है देवत्व के और ज्यादा करीब लाता है | घर के चारों ओर दिये और मोमबत्ती जलाकर प्रत्येक कोने को प्रकाशमान किया जाता है | यह माना जाता है की पूजा और अपने करीबी और प्रियजनों को उपहार दिये बिना यह त्यौहार कभी पूरा नहीं होता है | व्यापारी अपने वर्ष के कर्च और लाभ जानने के लिए अपने बहीखातों की जाँच करते है | शिक्षक किसी भी विषय में अपने छात्रों की प्रदर्शन और प्रगति का निरिक्षण करते है | लोग उपहार देने के माध्यम से दुश्मनी हटाकर सभी से दोस्ती करते हैं | कॉलेज के छात्र अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों को दीवाली कार्ड और एस एम एस भेजते है |

  • दिवाली का पहला दिन धनतेरस के नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ है घर में धन और समृद्धि का आना | लोग बर्तन, सोने और चाँदी के सिक्के, और अन्य वस्तुएँ खरीद कर इस विशवास के साथ अपने घर लाते है की घर में धन की वृद्धी होगी | 
  • दिवाली का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी के नाम के जाना जाता है जो इस विश्वास के साथ मनाया जाता है की भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर को हराया गया था | दिवाली का तीसरा दिन अमावश्य के साथ मनाया जाता है जो हिन्दू देवी लक्ष्मी की पूजा के इस विश्वास के साथ मनाया जाता है जो सभी इच्छाओं की पूर्ति करती है | 
  • दिवाली का चौथा दिन बलि प्रदा के नाम से जाना जाता है जो भगवान विष्णु की कथा से संबन्धित है जिन्होंने अपने वामन अवतार में राक्षस राजा बलि को हराया था | बलि बहुत महान राजा था किन्तु पृथ्वी पर शासन करते हुये वह लालची हो गया क्योंकि उसे भगवान कृष्ण द्वारा असीमित शक्तियों की प्राप्ति का वरदान मिला था | गोवर्धन पूजा इस विश्वास के साथ भी मनाया जाता है की भगवान कृष्ण ने असहनीय काम करके इन्द्र के गर्व को हराया था | 
  • दिवाली का पाँचवा दिन यम द्वितीया या भाई दूज के नाम से भी जाना जाता है | जो मृत्यु के देवता "यम" और उनकी बहन यामी के इस विश्वास के साथ मनाया जाता है | लोग इस दिन को बहन और भाई के एक दूसरे के प्रति प्रेम और स्नेह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है |
      दिवाली का जश्म मनाने के पीछे सबसे महशूर और अच्छी तरह से ज्ञात इतिहास का महान हिंदू महाकाव्य रामायण में उल्लेख किया है | इसके अनुसार राम १४ वर्ष का वन में एक लंबा जीवां के बाद अपने राज्य में वापस आये थे | राम के वनवास के पीछे महान उदेश्य लंका के दानव राजा रावण का वध करना था | भगवान राम अयोध्या लौटने का जश्म मनाया था | उस वर्ष से हर साल दीपावली का जश्म मनाने की यह महान हिंदू परंपरा बन गई |
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Saturday, October 15, 2016

चुकंदर (Beet) खाने से फायदे क्या क्या हैं ?

चुकंदर (Beet) फायदे : 

         चुकंदर एक ऐसी सब्जी है जिसे बहुत से लोग नापसंद करते है | इसके रस को पिने से ना केवल शरीर में रक्त में हिमोग्लोबिन की मात्रा बढती है बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी होता है | चुकंदर के फायदा क्या है और क्यों खाना चाहिए | अधिक से लोग चुकंदर का सब्जी बनाकर खाते है | यदि आप सब्जी से नफ़रत करते हो तो सुकंदर के फायदे निचे दिया हुवा है |


         आप अपनी डायट में लाल-बैंगनी रंग के चुकंदर को शामिल नहीं कर रहे है तो फ़ौरन कर दीजिये | चुकंदर आपके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखने से लेकर आपका सेक्सुअल स्टैमिना तक बढाता है | चुकंदर में अच्छी मात्रा में लौह की विटामिन और खनिज होता है | रक्त्वर्धन और शोधन के काम में सहायक होता है | इसमें पाए जाने वाले एंटीओक्सीडेंट तत्व शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है | खासकर के चुकंदर के रस का सेवन करने से व्यक्ति में रक्त संचार काफी बढ़ जाता है | रक्त की धमनियों में जमी हुई चर्बी को भी इसमें मौजूद बेटेन नामक तत्व जमने से रोकता है | चुकंदर एक कन्दमूल है और प्रोटीन भी मिलती है | यह जठर और आंतो को साफ़ रखने में मदद करता है | चुकंदर रक्तवर्धक (ब्लड को साफ़ करता ) शरीर में ताकत देने वाला और शरीर को लाल बनाने वाला कमजोरी को दूर करता है | चुकंदर का सेवन करने से शरीर फीकापन दूर होता है | शरीर लाल बनता है और शरीर में एक विशेष प्रकार की शक्ति एव चेतना उत्पन्न होता है | इसके अतिरिक्त चुकंदर दूध पिलाने वाली स्त्रियों के स्तनों में दूध को बढाता है |  यह जोड़ों के दर्द को दूर करता है | यह यकृत को शक्ति देता है और दिमाग को तरोताजा रखने में मदद करता है | सोडियम पोटेशियम, फोस्फोरस, क्लोरिन, आयोडीन, आयरन और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते है | चुकंदर खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है | उम्र के साथ उर्जा व शक्ति कम होने लगती है चुकंदर का सेवन अधिक उम्र वालों में भी उर्जा का संचार करता है | इसमें एंटीओक्सीडेंट पाए जाते है | जो हमेशा जवान बनाएं रखते है | चुकंदर शरीर को शुद्र और स्वस्थ करता है | यह बलगम को गलाकर बाहर निकालता है तथा गुर्दे के दर्द को झनकबाई  और दिमाग को तरोताजा रखता है | चुकंदर गुणकारी होने पर भी कंदमूल होने के कारण पचने में कुछ भारी पड़ता है | इसका अधिक मात्रा में सेवन कभी-कभी पेट में गैस पैदा करता है | अत: कमजोर पाचनशक्ति वालों को चुकंदर का प्रयोग सोच-विचार कर ही करना चाहिए |

      चुकंदर में पाये जाने वाले विभिन्न तत्व क्या है ?

  • चुकंदर में नाईट्रेटस का एक अच्छा स्त्रोत है इसका सेवन किए जाने पर ये नाइट्राईटस और एक गैस नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाता है | ये दोनों तत्व धमनियों को चोडा करने और ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है | शोधकर्ताओं ने ये भी पाया है की हर रोज 500 ग्राम चुकंदर खाने से लगभग 6 घंटे में व्यक्ति का ब्लड प्रेशर घट जाता है | 
  • चुकंदर का रस या चुकंदर को पानी में उबालकर इसका सूप सेवन करने से पथरी गलकर निकल जाती है इसकी मात्रा ३ ग्राम तक दिनमे ४ बार है | यह प्रयोग कुछ सप्ताह तक निरन्तर जारी रखे | इस प्रयोग से गुर्दे की सुजन भी दूर हो जाती है | अत: गुर्दे के रोगों में लाभदायक है | चुकंदर का रस निकालकर या चुकंदर को पानी में उबालकर उसका सूप ३० मिलीलीटर २-३ सप्ताह तक पिने में ४ बार बनाकर पिने से पथरी गल जाती है | 
  • गर्भवती महिलाओं में चुकंदर उच्च मात्रा में फोलिक एसिड पाया जाता है | यह पोषक तत्व गर्भवती महिलाओं और अजन्म बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योकि इससे अजन्म बच्चे का मेरुदंड बनने में मदद मिलती है | चुकंदर गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त उर्जा देता है | 
  • चुकंदर को नेचुरल वियाग्रा भी कहा जाता है | पुराने ज़माने में इसका इस्तेमाल यौन स्वास्थ्य के लिए किया जाता है | चुकंदर नाइट्रिक ऑक्साइड रिलीज करता है जिससे की रक्त वाहिनियों का विस्तार होता है और जेनेटल्स में खून का दौरा बढ़ता है | इसके अलावा, चुकंदर में बहुत अधिक मात्रा में एक केमिकल बोरोन पाया जाता है जो की ह्युमन सेक्स हार्मोन के निर्माण में मददगार होता है | इसलिए अगर अगली बार वियाग्रा लेने का सोचें तो पहले चुकंदर ट्राई करना चाहिए |
  • चुकंदर का जूस पिने से व्यक्ति का स्टैमिना १६ प्रतिशत तक बढ़ जाता है | ऐसा इसके नाइट्रेट तत्व के कारण होता है | शरीर में ऑक्सीजन बढ़ने से मस्तिष्क भी ठीक प्रकार से अपना काम कर पाटा है | चुकंदर खाकर आप डिमेंशिया तक में राहत पा सकते है |

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Friday, September 23, 2016

चक्कर क्यों आता है और घरेलु उपचार कैसे करना हैं ?

चक्कर आने की समस्या :

         चक्कर शब्द का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग होता है | कुछ लोगों के लिए इसका मतलब है सर भारी सा लगना और असंतुलित महसूस करना जबकि दुसरे लोग इस शब्द का प्रयोग तब करते हैं जब वो ये बताना चाहते हैं की उन्हें आस-पास सबकुछ घूमता हुआ सा लग रहा है | इस बीमारी का लक्षण काफी अस्पष्ट सा है और ऐसे कई तत्व हैं जो चक्कर आने के कारण हो सकते हैं | इसलिए चक्कर आने पर या आने से पहले इसे रोकने के लिए उपाय करना एक प्रयत्न-त्रुटी विधि से उपयोग करने की प्रक्रिया हो सकती है |


         अगर आपको दिन में कई बार चक्कर आता है और पूरी दुनिया गोल-गोल घुमती नजर आती है तो हो सकता है की आप वर्टिगो नामक बिमारी से ग्रस्थ हों | सिर दर्द, चक्कर, नोजिया यह वर्टिगो के लक्षण हैं | वर्टिगो लैटिन का शब्द है, जिसका अर्थ है चक्कर आना | दरअसल इसमें यह एहसास होता है की सब कुछ घूम रहा है | कैसे निपटें लो ब्लड प्रेशर से आप स्थिर हैं लेकिन कुछ सेकेंड के लिए वातावरण चक्कर लगाने लगता है | खास बात यह की आडा या तिरछा देखने पर इसमें सब घूमता दिखाई देता है | कभी-कभी चक्कर के साथ उल्टी जैसा भी महसूस होता है | अगर आपको लगातार कई महीनों से चक्कर आ रहें हैं तो उसे नजरअंदाज न करें | कई बार चक्कर आने का कारण लो बीपी या एनीमिया भी होता है | चक्कर आना एक सामान्य समस्या है जिसमें इंसान का सिर अचानक से घूम जाता है और उसकी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगता और वह गिर जाता है | लेकिन अधिक चक्कर आना भी आपके लिए खतरनाक हो सकता है | इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए वैदिक वाटिका आपको इसके कुछ सरल और आसान घरेलु उपायों के बारे में बता रहे है ताकि आप चक्कर आने की परेशानी से बच सकते है |

    घरेलु उपचार कैसे -
          यहाँ पर ऐसे कई उपाय बताये गए हैं जो आप तब अपना सकते है जब आपको चक्कर आ रहा हो | चक्कर आते ही सिर घुमने लगता है और आस-पास की सभी वस्तुएं घुमती नजर आती हैं | कई बार अधिक ऊंचाई पर या गहरे पानी को देखने से भी चक्कर सा आने लगता है | ऐसी स्थिति में क्या चिकित्सकीय उपचार है | यूं तो महीने के आखिरी दिनों में यदि मेहमान घर में आ जाएं तो कुछ मेजबानों को चक्कर आ जाता होगा परंतु यहाँ हम उस चक्कर की नहीं बल्कि वास्तविक चक्कर, वर्टिगो की बात कर रहे हैं |

  • नारियल पानी का सेवन और नारियल का पानी रोज पिने से चक्कर आना बंध हो जाते हैं | आंवले के पाउडर का सेवन सुखा आंवला पिस कर चूर्ण बनाये फिर 10 ग्राम आंवला चूर्ण को 10 ग्राम धनिया पाउडर के साथ 1 ग्लास पानी के साथ पीना चाहिए |
  • अदरक खाएं खाने में और चाय में अदरक का भरपूर प्रयोग करे अदरक चक्कर को रोक देता है | जब चक्कर आता है तब लेट जाएं तुरंत लेट जाएं | सिर के निचे तकिया जरुर लगाना चाहिए  |प्राणायाम करें अगर ज्यादा चक्कर आता है तो रोज सुबह उठ कर अनुमोल विमोल प्राणायाम करनी चाहिए | 
  • कम पियें चाय-कोफ़ी इस समस्या को दूर करने के लिए चाय और कोफ़ी पर नियंत्रण लगाए | इससे चक्कर आने की तकलीफ बढती है | ठंडा पानी पियें जब चक्कर आने पर और बर्फ के सामान ठंडा पानी 3 ग्लास पिने से भी तुरंत राहत मिलती है | 
  • ब्लडप्रेशर में अचानक से कमी का आना, दिमाग में खून का सही तरह से प्रवाह न हो पाना, शरीर में पोषक तत्वों की कमी आदि चक्कर आने की मुख्य वजह होता है | अक्सर चक्कर आने का कारण शरीर में पानी की कमी हो जाना होता है | सामान्यतय पानी की कमी तब होती है जब आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं ले रहे होते हैं |
  • तेज चमक वाली रौसनी से आपका ध्यान भटक सकता है और चक्कर आने की समस्या गंभीर हो सकती है | किसी अँधेरे कमरे में बैठने या लेटने की कोशिश करें या एक या दो मिनट के लिए अपनी आँखे बंध कर लेनी चाहिए | 
  • अगर आपको चक्कर आते रहते हैं तो अचानक से कोई मूवमेंट नहीं करना चाहिए क्योंकि तेजी से मूवमेंट करने पर आपका ब्लडप्रेशर भयंकर रूप से बढ़ सकता है | आप जब भी उठे या बैठे तो अगर संभव हो तो आपको किसी मजबूत और स्थिर सतह को पकड़ के धीरे-धीरे और सतर्कता के साथ कोई भी हरकत करनी चाहिए |
उदहारण के लिए भूखे रहने पर आपको चक्कर आ सकता है, काफी तेजी से खड़े होने पर या बहुत गर्म पानी से नहाने पर भी आपको चक्कर आ सकता है | इसलिए चक्कर आने के कारणों का पता करके  आप पहले से ही चक्कर आने की समस्या का समाधान कर सकते है |

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Thursday, September 8, 2016

अस्थमा के कुछ बुनियादी का समस्या क्या है ?

अस्थमा का जीत :

           यहाँ आप जानेंगे अस्थमा के बारे में कुछ बुनियादी बाते । आप भी यह बात जान जाएंगे की अस्थमा पर जीत आसान है ।और आप यह जीत हासिल कर सकते है । अस्थमा पर जीत कितनी आसान है । हमें सिर्फ रोजाना अपनी दवा लेनी होती है जो मुझे बिलकुल ठीक रखती है । मगर मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं की एक लंबे समय तक मैं डॉक्टर के पास जाने से बचता रहा । मुझे खाँसी आती थी मगर क्योंकि इन दिनों बहुत बार लोग प्रदुषण या फ़्लू वगैरा की वजह से भी खाँसते हैं । अपने फेफड़ों में निचे दिया हुवा ऐसे दीखता हैं । यह डॉक्टर ने कुछ तस्वीरों और मॉडल्स की मदद से समझाया की अस्थमा होने पर यह होता हैं ।


             फेफड़ों के अंदर छोटी-छोटी हवा-नलिया (एयर ट्यूब्स) होती हैं जो ठीक तरह खुली होनी चाहिएँ जैसे यहाँ दिखाया गया है । मगर अस्थमा की वजह से यह हवा-नलियां बेहद संवेदनशील हो जाती हैं । अगर कोई चीज उनमे उत्तेजना पैदा करे तो उनमें अंदर से सूजन आ जाती हैं । और वो सिकुड़कर एक चिपचिपे पदार्थ जिसे " म्युकस" कहते है । यह ब्लॉक हो जाती हैं । इसलिए कभी-कभी साँस लेने में दिक्कत होती हैं ।

अस्थमा के रोगी के लिए क्या सावधानी बरते -
  • अस्थमा के रोगियो को अक्सर आम्लपित्त / एसिडिटी की तफलिफ होती है इसलिए चाय, कोफ़ी. तेल, गरम मसाला नहीं लेनी चाहिए | व्यायाम करने के 10 मिनिट पहले अपनी दवा लेनी चाहिए | अस्थमा वाले व्यक्ति को अकेले कभी व्यायाम नहीं करनी चाहिए | 
  • अस्थमा के दौरान के दरम्यान ठंडा पानी, आइसक्रीम, छाछ, ठंडे फ्रूटज्यूस इत्यादि नहीं लेनी चाहिए | ठंडे पानी से न नहाये या ज्यादा समय तक बालो को गिला ना रखे | सर्दी-जुखाम हलकी खाँसी, बुखार इनकी उपेक्षा ना करे | 
  • धुल, मिट्टी, ठंडी हवा गंध रसायन, सिगरेट-बीडी का धुवा,तंबाकू के संपर्क से बच कर रहना चाहिए | अस्थमा के अन्य कारणों से अपना बचाव करे | उदहारण के लिए ठंडी हवा, फूल के पराग कन प्रदूषित हवा, धुल, धुवा और अन्य | सर्दी-जुखाम या वायरल इन्फेक्शन होने पर कसरत नहीं करनी चाहिए |
  • अगर आपको एलर्जिक अस्थमा है तो घर के बाहर या जिस जगह पर धुल मिट्टी ज्यादा है वहा कसरत करने से बचना चाहिए | ठन्डे मौसम में घर के अन्दर व्यायाम करे या मुंह पर मास्क या स्कार्फ लगा कर व्यायाम करनी चाहिए | 
  • ठंडी के दिनों में हमेशा गरम कपडे पहने और थंड से अपना बचाव करे | AC के सामने ना सोये |
अस्थमा के रोगी के लिए दवा संबंधी जानकारी -

           हमेशा डॉक्टर द्वारा दी हुई पूरी दवाई ले. अस्थमा में दवाई हमेशा धीरे-धीरे कम की जाती है | डॉक्टर द्वारा दी हुई दवाई ख़त्म हो जाने पर डॉक्टर द्वारा निर्देशित तारीख पर फिरसे जाच कराने जाना चाहिए | अचानक दवा बंध करने से या डॉक्टर द्वारा बताते समय अनुसार दवा ना लेने पर अस्थमा दौरा फिरसे हो सकता है | डॉक्टर से कोई भी सवाल या समस्या पूछने से ना हिचकिचाए | कभी कभी डॉक्टरी सलाह मशवरे के बिना स्वयं मेडिकल से कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए |

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Sunday, September 4, 2016

गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है !

गणेश चतुर्थी महत्व :

        भारतीय संस्कृति के अनुसार संस्कारों में किसी कार्य की सफलता हेतु पहले उसके मंगला चरण या फिर पूजा देवों के वंदन की परम्परा रही है | सर्वप्रथम श्रीगणेश जी की वंदना व अर्चना का विधान है | इसलिए धर्म में सर्वप्रथम श्रीगणेश जी की पूजा से ही किसी कार्य की शुरुयात होती है | श्रीगणेश पूजा अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है । चाहे वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट में पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो । जो गणेश व्रत या पूजा करता है उसे मनोवांछित फल तथा श्रीगणेश प्रभु की कृपा प्राप्त होती है । पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्र आसान में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धुप, दीप, कपूर, लाल चंदन, आदि एकत्रित कर क्रमशः पूजा करनी चाहिए । भगवान श्रीगणेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए । उन्हें शुद्र स्थान से चुनी हुई दूर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए ।

     

         श्रीगणेशोत्सव की महारष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, आदि स्थानों में बड़ी ही धूम धाम होती है | भक्तगत यह ध्यान देते है की किसी भी पूजा के उपरांत सभी आवाहित देवताओं की शास्त्रीय विधि से पूजा-अर्चना करने के बाद उनका विसर्जन किया जाता है | किन्तु श्री लक्ष्मी और श्रीगणेश का विसर्जन नहीं किया जाता है | इसलिए श्रीगणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करे, किन्तु उन्हें अपने निवास स्थान में श्री लक्ष्मी जी सहित रहने के लिए नियंत्रित करनी चाहिए | पूजा के उपरांत क्षमा प्रार्थना करें सभी अतिथि व भक्तो का व्यवहार स्वागत करनी चाहिए | और पूजा कराने वाले ब्राम्हण को संतुष्ट कर यथा विधि पारिश्रमिक दान आदि देनी चाहिए | उन्हें पप्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर दीर्घायु, आरोग्यता, सुख, समृद्री, धन-ऐश्वर्य आदि को बढाने के योग्य बनें | श्रीगणेश भगवान को मोदक लड्डू अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने मोदक का प्रसाद भी चाहिए | श्रीगणेश स्त्रोत से विशेष फल की प्राप्ति होती है | श्रीगणेश सहित प्रभु शिव व गौरी, नंदी, कार्तिकेय सहित सम्पूर्ण शिव परिवार की पूजा षोडशोपचार विधि से करना चाहिए | व्रत व पूजा के समय किसी प्रकार का क्रोध व गुस्सा न करें | यह हानिप्रद सिद्र हो सकता है | श्रीगणेश का ध्यान करते हुए शुद्र व सात्विक चित्त से प्रसन्न रहना चाहिए |

  • श्रीगणेश अनेक नामों से विख्यात विग्नेश्वर, विघ्न विनायक, रिद्धि के दाता भगवान गणेश सभी कार्यों में प्रथम पूजनीय है | इस से सभी परिचित है | 
  • तिथिषा वाहिंकौ गौरी गनेशोहिर्गुहो रवि: || वसुदुर्गंतको विश्वे हरी: काम: शिव: शशि: ||
  • प्रतिपदा तिथियों के अधिष्ठता क्रमश: इस प्रकाश है | तिथि तथा उनके स्वामी | अग्नि ब्रह्म गौरी गणेश सर्प कर्तिकेया सूर्य वसु दुर्गा काल विश्वेदेवा विष्णु कामदेव शिव चंद्रमा |
  •  चंद्र दर्शन सभी चतुर्थी पर, विशेष रूप से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को निषिध माना जाता है | शास्त्रों व समाज में प्रचलित है की इस दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लगता है |
  • पुराणों में उल्लेख मिलता है की भगवान् कृष्ण को भी मिथ्या कलंक लगा था | द्वारिकवासी सत्राजित को सूर्य से एक मणि प्राप्त हुई. भगवान कृष्ण भी उस मणि को देख कर आकर्षित हुए थे | उन्होंने तो मजाक में यहाँ तक कह दिया था की यह मणि तो मुझे भी बहुत पसंद है |  कुछ समय के पश्चात सत्राजित को यह शंका हो गयी की भगवान कृष्ण ने ही वह मणि ली होगी. ऐसा मिथ्या कलंक भगवान को भी लगा |
  • दर्शन शास्त्र में कोई भी कार्य अकारण नहीं होता हमारे पूर्वज ऋषि मुनियों ने इस बात पता लगाया की ग्रहों की स्तिथि के अनुशार ही व्यक्ति का मन (मुड) बदलता रहता है |
  • ज्योतिष की गणना के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को सूर्य के जो त्रिभुज कक्षा बनती है उसे षडाषटक, नवपंचम और द्रविरद्वादश दोष बनता है | जिस कारण भी इस दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लगना स्वाभाविक है क्योकि हमारा मन और आत्मा दोनों पर कंट्रोल नहीं होता |                                                                                                                                                   यह आपको पढ़कर अच्छा लगा हो तो अपने मित्र या ग्रुप में अवश्य शेयर करे | स्वास्थ्य के लिए अधिक    जानकारी  www.jangaltips.blogspot.in  पे क्लिक करो या गूगल पर टाइप करो | यदि आपके  पास      स्वास्थ्य के बारे में अधिक जानकारी है तो हमारी                                                             E-mail Id है : jangaltipsin2015@gmail.com पर भेज सकते है Thanks.

Tuesday, August 30, 2016

त्वचा की समस्या और देखभाल के टिप्स क्या है ?

त्वचा की समस्या और देखभाल :

        त्वचा का गोरापन जन्म के साथ आता है | मगर इसका मतलब यह नहीं है की बाकी लोग की त्वचा गोरी नहीं हो सकती है | त्वचा में चमक यानी ग्लो दो तरह से आती है | एक महंगे कोस्मेटिक से जो टिकाऊ नहीं होती और दूसरा प्रकृति यानी कुदरत से हमें सुन्दर दिखने के लिए नायाब उपहार दिए है |  क्या आपने कभी खास मौसम में या किसी एलर्जी की वजह से अपनी त्वचा पर लाल-लाल चकत्तों का आना, खुजली या फिर नोंचने-खरोचने की इच्छा | यह सभी स्किन सेंसेटीविटी  यानी त्वचा संवेदनशीलता के संकेत हैं |


       अगर हम इसे आजमाएं तो त्वचा का गोरापन कोई सपना नहीं रह जाएगा | बस जरुरत है इसके इस्तेमाल की विधि को जानने की | त्वचा पर एलर्जी या बाहरी तत्वों से बचाव के लिए एक बैरियर होता है | यह बैरियर स्किन का PH लेवल होता है | स्किन बैरियर उन सभी कारकों से लड़ता है जो आपकी त्वचा की संवेदनशीलता को बढाती है | हमारी त्वचा बहुत सारे चीजों के संपर्क में आती है | जैसे एयर कंडीशन, मौसम, गर्मी, ठंड, बरसात, सूर्य की तेज पराबैंगनी किरणे केमिकल और धुल-गुबार इत्यादि | त्वचा की उपरी सतह पर pH लेवल ५.५ होता है | यह लेवल सभी तरह के बदलाव को सहन करता है |

घरेलु उपचार त्वचा की समस्या -
       इसे आजमाएं झाइयां होगी ख़त्म एक चम्मच क्रीम में पिसे हुए बादाम और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें | इसे चेहरे पर लगाएं | इस फेस पैक से चेहरे की झाइयां ख़त्म होती है | सफ़ेद तिल और हल्दी की बराबर मात्रा लें और इसे पानी के साथ अच्छी तरह पिस लें | इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाएं | सूखने पर उबटन की तरह मलकर छुडाएं | झाइयाँ छु मंतर हो जाएगी | झाइयों पर पपीता मलने से भी काफी फायदा होता है | हालांकि ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें इस बात का नहीं पता होता की उनकी त्वचा किस प्रकार की है ? संवेदनशील या सामान्य तो आइए पहले जानते हैं की वे कौन से संकेत हैं जो हमें हमारी त्वचा की संवेदनशीलता का आभास कराते हैं |

  • शेव करने के बाद त्वचा रुखा हो जाना या जलन और खुजली होना | चेहरा धोने के बाद उसमें खिंचाव महसूस करना | त्वचा अचानक ज्यादा लाल हो जाना और मुंहासे निकल आना | मौसम के बदलाव का त्वचा पर जल्द असर दिखना | 
  • बिना किसी बाहरी कारण के भी त्वचा में जलन होना या खुजली होना | कुछ नहाने और कपडे के साबुन भी ऐसे होते हैं जिनके प्रयोग से त्वचा में जलन होने लगती हैं | 
स्किन का सेंसेटिव ख्याल कैसे रखना है |

  • जांच- परखकर ही कोस्मेटिक का इस्तेमाल करनी चाहिए | धुल-मिट्टी और केमिकल से त्वचा को बचा कर रखनी चाहिए | हर्बल और नेचुरल सौन्दर्य उत्पादों का इस्तेमाल करनी चाहिए | धुप में निकलने से पहले चेहरे पर सनस्क्रीन क्रीम या लोशन लगानी चाहिए |
  • ठंड में हमेशा मुलायम उन के स्वेटर पहने | सिंथेटिक उन से स्क्रीन में एलर्जी हो सकती है | बालों में कंघी के लिए कड़े बालों वाले ब्रश का इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए | तेज परफ्यूम वाले साबुन या डिटरजेंट के प्रयोग से परहेज करनी चाहिए | सौंदर्य उत्पाद खरीदते समय लेबल को देख लें अगर वह संवेदनशील त्वचा के लिए है तभी ही खरीदनी चाहिए |
गोरापन पाने की आसान और उपाय कैसे करे |
  • चेहरा धोने के लिए हमेशा एंटी बैक्टेरिया साबुन का उपयोग करनी चाहिए | चेहरे को दिन में २-३ बार धोएं | जिनकी त्वचा तैलीय होती है उन्हें अधिक चेहरा नहीं धोना चाहिए क्योकि यह त्वचा की तेल ग्रंथियों को सक्रीय करती है | 
  • सप्ताह में २-३ बार चेहरे को स्क्रब करना चाहिए क्योकि इससे त्वचा की मृत त्वचा कोशिका खत्म होती है और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है | दिन भर में कम से कम १० ग्लाश पानी पिएँ | पानी आपके श रीर से विषाक्त पदार्थो को बाहर करती है |                                                                                             यह आपको पढ़कर अच्छा लगा हो तो अपने मित्र या ग्रुप में अवश्य शेयर करे | स्वास्थ्य के लिए अधिक    जानकारी  www.jangaltips.blogspot.in  पे क्लिक करो या गूगल पर टाइप करो | यदि आपके  पास स्वास्थ्य के बारे में अधिक जानकारी है तो हमारी                                                      E-mail Id है : jangaltipsin2015@gmail.com पर भेज सकते है Thanks.

     
      
        

Saturday, August 27, 2016

खुजली का समस्या और उपचार कैसे करना है !

खुजली का समस्या :

          खुजली शरीर में कई कारण हो सकते है | जैसे की किसी खाध पदार्थ या दवा से एलर्जी, त्वचा का रुखा होना, ठीक से न नहाना और गंदे कपडे पहनना मच्छर या अन्य किटानो काटने से कोई चर्म रोग या पेट में कीड़े होने आदि पर खुजली की समस्या हो सकती है | रिसर्च के अनुसार, शरीर में इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी के कारण भी खुजली होती है | खुजली होने पर किसी भी काम में मन नहीं लगता इंसान सिड्चीडा होता है | इसलिए इसको दूर करने के उपाय करना बहुत जरुरी होता है |


       यहाँ निचे दिया हुवा चार पांच प्रकार है जैसे की नारियल, पुदीना, तुलसी, सेब के सिरके, और नींबू अनेक काम आने वाली खुजली को दूर कर शकते है |

  • नारियल का तेल खुजली वाली त्वचा के लिए तेल बहुत अच्छा होता है | शुष्क त्वचा या मच्छर के काटने पर होने वाली खुजली के लिए तो नारियल का तेल अद्रत काम करता है | प्रभावित क्षेत्र पर सीधा इसे लगाना नारियल के तेल को इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका हैं | 
  • तुलसी के पत्ते थिमोल और कपूर से समृद्र होने के कारण है | इनमे त्वचा की जलन को कम करने की क्षमता होती है | खुजली होने पर तुलसी के कुछ पत्तों को लेकर उन्हें प्रभावित क्षेत्र पर रगड़े | या तुलसी के पत्तों की चाय बनाकर उसे खुजली वाले स्थान पर लगाना चाहिए | 
  • विटामिन C से नींबू समृद्र और ब्लीचिंग प्रकृति के कारण नींबू खुजली वाली त्वचा के लिए सबसे अच्छे उपायों में से एक है | नींबू में मौजूद वाष्पशील तेल में उत्तेजना को सुन्न करने की क्षमता होती है | जिसके कारण यह जलन और सुजन को दूर करने में मदद करता है | इसके लिए नींबू को काटकर उसके रस को खुजली वाली जगह पर मलने से हर तरह की खुजली से छुटकारा मिल जाता है |
  • कीड़े के काटने और खुजली के लिए पुदीना बहुत अच्छा होता है | यह शीतल संवेदना प्रदान कर आपको तुरंत राहत का अनुभव करता है | इसकी पत्तियों को मसलकर सीधे खुजली वाले स्थान पर रगड़ना पुदीने को लगाने का सबसे आसान और तेल तरीका है |
  • बहुत से लोग सेब का सिरका सिर में रुसी को दूर करने के लिए सिरके का उपयोग करते हैं | इसी तरह से यह खुजली वाली त्वचा के लिए भी अच्छी तरह से काम करता है | इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुण इसे खुजली विरोध एजेंट बनता है | खुजली वाले स्थान पर रुई की सहायत से सेब के सिरके को लगाने से फायदा होता है | 
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गर्मी के बाद बारिश का शरीर को क्या लाभ मिलती है |

 बारिश के लाभ :           गर्मी के बाद बारिश बहुत ही सुकून देती है | बारिश का इंतज़ार हर किसी को रहता है | बारिश के पानी का लाभ सभी को ...