Monday, January 23, 2017

२६ जनवरी क्यों मनाया जाता है इसी दिन परेड और कार्यक्रम कैसे होता है ?

२६ जनवरी निबंध :

          भारत एक राष्ट्रीय पर्व जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है | इसी दिन सन 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया था | पहली गणतंत्र दिवस की परेड 1950 में प्रदर्शित की गयी थी जब भारत का पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया था | भारतीय राष्ट्रपति के पहुँचने के बाद परेड शुरू होती है | परेड से पहले भारत के प्रधानमंत्री इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर पुष्प अर्पित करके भारत के लिए अपने जीवन का बलिदान करने वाले भारतीय जवानों को श्रधांजलि देते हैं | और भारत के राष्ट्रपति राष्ट्रिय ध्वज को फहराते हैं |


          हर साल भारत में दो-चार राष्ट्रिय पर्व मनाये जाते हैं | 26 जनवरी के दिन मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस उन सभी में सबसे प्रमुख एवं महत्वपूर्ण पर्व या उत्सव है | और हमारे देश 15 अगस्त सन 1947 के दिन लगभग दो सताब्दी तक परतंत्रता की यातनाएं भोगते रहने और अनेक प्रकार के त्याग और बलिदान करने के बाद कहीं जाकर भारत देश स्वतंत्र हुवा था | 26 जनवरी को पूरा भारत रिपब्लिक डे मनाया जाता है | राजपथ पर उस दिन भारत के राष्ट्रपति तिरंगा फहराते है लेकिन क्या आप जानते है यह 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है क्योंकि पहली बार राष्ट्रीय ध्वज कहां फहराया था ? हमारे नेता डोमिनन स्टेटस के पक्ष में थे | जहा यूके का मोनार्च ही भारतीय संविधान का अध्यक्ष होगा | साल 1927 के दरमियान भगत सिंह और हिंदुस्तान रिपिब्लिक एसोशियशन की भारतीय राजनीती में मांग बढ़ रही थी | कांग्रेस से अलग भगत सिंह और उनकी फौज ने भारत की पूरी आजादी की बात राखी | अब इससे इंडियन नेशनल कांग्रेस के जो युवा नेता थे सुभाष चंद्र बोस, जवाहर लाल नेहरु वे भी प्रभावित हो गए | उन्होंने कांग्रेस से मांग की वे भी पूरी आजादी की मांग करे, लेकिन उनकी ये आवाज सुनी नहीं गई |  दिसंबर 1928 में आईएनसी ने डोमिनन स्टेटश की मांग करते हुए एक प्रस्ताव लाइ, और ब्रिटिश सरकार को एक साल का समय दिया ब्रिटिश ने इस विचार को नकार दिया, ये कहते हुए भारत डोमिनन स्टेटस के लिए अभी तैयार नहीं हैं | अब इससे कांग्रेस नाराज हो गई | लाहौर में 1929 में एक सेशन के दौरान नेहरु को अध्यक्ष चुन लिया गया | और कांग्रेस ने डोमिनन स्टेट्स से अलग पूर्ण स्वराज के लिए वोट किया | इसके बाद एक प्रस्ताव पारित हुआ की 1930 में जनवरी के दिन आखिर रविवार को स्वतंत्रा दिवस के रूप में मनाया जाए | जनवरी का आखिर रविवार 1930 में 26 तक को पड़ा | इस दिन जवाहर लाल नेहरु ने लाहौर में रवि नदी के किनारे तिरंगा फहराया | इसके बाद भारत ने 26 जनवरी 1930 में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया लेकिन ब्रिटिश अभी भारत में ही थे | 15 अगस्त 1947 से पहले जब भारत को आजादी मिली, हमारी संविधान सभा जिसका गठन 1946 में हो गया था और हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 तक तैयार हो गया था तब  जो नेता थे उनहोंने दो महीने और रुकने का निर्णय लिया ऐसे में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है |

गणतंत्र दिवस के ही दिन परेड का कार्यक्रम होता है :-

         भारत में गणतंत्र दिवस हर साल एक बड़ी ही और भव्य गणतंत्र दिवस परेड को नई दिल्ली में राजपथ, इंडिया गेट पर आयोजित करके मनाया जाता है | वार्षिक रूप से 26 जनवरी को राष्ट्रपति द्वारा ध्वजारोहण के बाद गणतंत्र दिवस परेड की जाती है | ये गतिविधि भारतीय गणतंत्र दिवस के उत्सव का प्रमुख आकर्षण होती है जो आमतोर पर बीटिंग रिट्रीट समारोह के होने तक अगले 3 दिनों तक चलती है | ये भारतीय सरकार द्वारा सुरक्षा क्षमता भारत की सांस्कृतिक और सामजिक विरासत को पूरी दुनिया के सामने दिखाने के लिए आयोजित की जाती है | भारत की गणतंत्र दिवस की परेड दुनिया की सबसे प्रसिद्र परेडों में से एक है जिसमें 25 से अधिक चलते और घुड़सवार दल वाले, लगभग 20 सैन्य बैंड, विभिन्न सैन्य वाहन, 30 विमान, 30 सांस्कृतिक झाँकी, राज्यों के अनुसार सांस्कृतिक झांकी और 1200 स्कूल के बच्चे शामिल होते हैं |

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Friday, January 20, 2017

तम्बाकू एव गुटखा के नुकसान और कैसे छोड़ने की दवा क्या है ?

तम्बाकु और गुटखा : 

          पुरे वॉल्ड में लाखों करोडो लोग तम्बाकु एवं अन्य मामुली बात पार्लर कानशा कहते है | जो सायद उन्हें एक मामूली बात लगती है पर ऐसे करके अपने पूरा परिवार और बच्चो को धोखा देते है | देश में हर साल लाखो लोग तम्बाकू से होने वाली विभिन्न बीमारियों का शिकार होते है | बहुत से लोग नशा छोड़ना चाहते है पर उनसे छुटता नहीं है | बार बार कहते है हमें मालूम है ये गुटखा या तम्बाकू खाना अच्छा नहीं है लेकिन तलब उठ जाती है | महसूस होता है यह बीडी, सिगरेट, शराब, गुटखा और तम्बाकू यह पीना अच्छा  नहीं है लेकिन तलब हो जाती है तो क्या करना चाहिए |


          धुम्रपान की आदत छोड़ना सबसे बड़ी चुनोती है | अन्य व्यसनों की तरह धुम्रपान की आदत छोड़ने के कारण शरीर में शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रियाएं होती है | हम में से बहुत कम लोग यह जानते है की बिना किसी दवा के उपयोग के हम इस व्यसन से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं | अधिकतर गतिविधियों के लिए एक योजना तैयार करना और फिर इसका पालन करना सफलता के लिए सबसे बेहतर तकनीक है | तम्बाकू छोड़ने की एक व्यापक पूरी तरह से सुनियोजित योजना बनाकर उस पर अमल करने से पहले आपकी लत के सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए | धुम्रपान बंद करने के फायदे लगातार २० वर्ष तक सिलसिलेवार धुम्रपान करने वालों के सिगरेट छोड़ देने पर कई फायदे है | २० मिनिट में रक्तचाप सामान्य ८ घंटे में रुधिर में आक्सीजन की मात्रा सामान्य २४ घंटे में हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है | ४८ घंटे में तंत्रिका विकसित होने लगती है, १४ दिन में रक्त प्रवाह सामान्य होने लगता है | ३ महीने में फेफड़े की कार्यक्षमता सामान्य होने लगती है, १-९ महीने में खांसी थकान व सांस सामान्य होने लगती है | एक साल में हदय रोग का खतरा ५० प्रतिशत कम हो जाता है और १० साल में कैंसर का खतरा ५० प्रतिशत कम हो जाता है |  आप धुम्रपान करने वाले किस प्रकार के व्यक्ति हैं | आपको सिगरेट की आवश्यकता कब पड़ती है और क्यों इससे आपको उन सलाहों, तकनीकों और उपचारों को पहचानने में सहायता मिलेगी जो आपके लिए सबसे अधिक लाभदायक हो सकता हैं |  जैसे ही आप धुम्रपान बंध करेंगे अतिरिक्त कैलोरीज बर्न करने के कारण आपका वजन बढना भी रुक जाएगा | दोस्त के साथ शर्त लगायें आप अपने दोस्त के साथ शर्त लगा सकते हैं तथा धुम्रपान छोड़ने की एक तिथि निर्धारित कर के उस समय तक धुम्रपान छोड़ सकते हैं | जब भी आप बाहर जाएँ पानी या जूस पियें | कुछ लोगों ने यह देखा है की सिर्फ पेय पदार्थ में परिवर्तन करके आप सिगरेट की आदत को कम कर सकते हैं |

गुटखा तम्बाकू आदत को छोड़ने का विधि -

  • सुखी आवले के टुकड़े, इलायची, सोफ़ और हरद के मिलाकर अपने पास रख लेनी चाहिए | जब भी नशा करने की तलब लगे तो इन टुकडो को मुंह में रख ले और चबाते रहे | इनसे तलब तो कम होगी ही साथ ही खट्टी डकार, भूख ना लगने और पेट फूलते की मुसीबत ( प्रॉब्लम ) में भी आराम मिलता है |
  • आपको बीडी सिगरेट की तलब न आए गुटखा खाने की तलब न लगे | शराब पिने की तलब न गले इसके लिए बहुत अच्छे दो उपाय है जो आप बहुत आसानी से कर सकते है | पहला ये जिनको बार बार तलब लगती है जो अपनी तलब पर नियंत्रण नहीं कर पाते इसका मतलब उनका मन कमजोर है ! तो पहले मन मजबूत बनाओ !
  • मसाला, शराब या गुटखा खाने की आदत को छोड़ने के लिए १०० ग्राम सौंफ, १० ग्राम अजवाइन और थोडा सेंधा नमक लेकर उसमें दो नींबुओं का रस निचोड़ के तवे पर सेंक लें | यह मिश्रण जेब में रखे | जब भी उस घटक पान मसाले की याद सताए, जेब से थोडा सा मिश्रण निकाल कर मुँह में डालें | इससे आपका पाचनतंत्र भी ठीक रहेगा और रक्त की शुद्री भी होगी | आपका निश्चय और संकल्प मजबूत हो तो कोई चीज असम्भव नहीं है |
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Friday, January 13, 2017

मकर संक्रांति क्या है और इस दिन क्यों पतंग उड़ाते है ?

मकर संक्रांति :

         मकर संक्रांति के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ हो जाती है इसलिए मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहते है | भारत में प्रतिवर्ष कई तरह के त्यौहार मनाएँ जाते हैं और उन त्योहारों के संबंध में कई तरह की मान्यताएं भी प्रचलित होती है | जैसे दिवाली पर पटाखें जलाना, तो होली पर रंग खेलना | ठीक इसी तरह से मकर संक्रांति पर भी पतंग उड़ाई जाती है | हिन्दू धर्मं में माह को दो पक्षों में बाँटा गया है | १. कृष्ण पक्ष और २. शुक्ल पक्ष | ठीक इसी तरह से वर्ष को भी दो अयनों में बाँटा गया है | उत्तरायण और दक्षिणायण | यदि दोनों को मिला दिया जाए तो एक वर्ष पूर्ण हो जाता है |



           मकर संक्रांति पौष मास में जब सूर्य धनु राशी को छोड़कर मकर राशी राशी में प्रवेश करता है तब मकर संक्रांति त्यौहार मनाया जाता है और सूर्य धनु राशी से मकर राशी में प्रवेश करता है इसलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है | यह एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसे संपूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है | वैसे तो यह त्यौहार जनवरी माह की 14 तारीख को मनाया जाता है लेकिन कभी-कभी यह त्यौहार 12, 13, 14, या 15 जनवरी में से किसी एक दिन ही मकर राशि में प्रवेश करता हैं | उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतिक माना जाता है | इसलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्रधा, अर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों को विशेष महत्व दिया जाता है | हमारे देश में मकर संक्रांति के पर्व को कई नामों से जाना जाता है | पंजाब और जम्मूकश्मीर में इसे लोहड़ी के नाम से बहुत ही बड़े पैमाने पर जाना जाता है | लोहड़ी का त्यौहार मकर संक्रांति के एक दिन पर्व मनाया जाता है | जब सूरज ढल जाता है तब घरों के बाहर बड़े-बड़े अलाव जलाए जाते हैं और स्त्री तथा पुरुष सज-धजकर नए-नए वस्त्र पहनकर एकत्रित होकर उस जलते हुए अलाव के चारों और भांगड़ा नृत्य करते हैं और अग्नि को मेवा, तिल, चिवड़ा आदि की आहुति भी देते हैं | संक्रांति यानि सम्यक क्रांति इस नामकरण के नाते तो मकर संक्रांति सम्यक क्रांति का दिन है । एक तरह से सकारात्मक बदलाव के लिए संकल्पित होने का दिन । ज्योतिष व नक्षत्र विज्ञान के गणित के मुताबिक कहें तो मकर संक्रांति ही वह दिन है जब सूर्य उत्तरायण होना शुरू करता है और एक महीने मकर राशि में रहता हैं । तत्पश्चात सूर्य अगले पांच माह कुंभ, मीन, मेष, वृक्ष, और मिथुन राशि में रहता है । इसी कारण मकर संक्रांति पर्व का एक नाम उत्तरायणी भी है ।

 मकर संक्रांति के दिन क्यों खातें है तिल और गुड :-

          भारत में हर त्यौहार पर विशेष पकवान बनाने व खाने की परंपराएं भी प्रचलित हैं | श्रुंखला में मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष रूप से तिल व गुड के पकवान बनाने व खाने की परंपरा है | कहीं पर तिल व गुड के स्वादिष्ट लड्डू बनाए जाते हैं तो कहीं चक्की बनाकर तिल व गुड का सेवन किया जाता है | तिल व गुड की जगह भी लोग खूब पसंद करते है लेकिन मकर संक्रांति के पर्व पर तिल व गुड का ही सेवन क्यों किया करते है इसके पिसे भी वैज्ञानिक आधार है | सर्दी के मौसम में जब शरीर को गर्मी की आवश्यकता होती है तब तिल व गुड के व्यंजन यह काम बखूबी करते हैं, क्योंकि तिल में तेल की प्रचुरता रहता है जिसका सेवन करने से हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में तेल पहुंचता है और जो हमारे शरीर को गर्माहट देता है |  इसी प्रकार गुड की तासीर भी गर्म होती है | तिल व गुड को मिलाकर जो व्यंजन बनाए जाते हैं वह सर्दी के मौसम में हमारे शरीर में आवश्यक गर्मी पहुंचाते हैं | यही कारण है की मकर संक्रांति के अवसर पर तिल व गुड के व्यंजन प्रमुखता से खाए जाते हैं |

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Thursday, January 5, 2017

अस्थमा क्या है और घरेलु उपचार कैसे करना हैं ?

अस्थमा (Asthma) :

            अस्थमा कहे या हिंदी में दमा ये श्वसन तंत्र की बीमारी है जिससे कारण सांस लेना मुश्किल हो जाता है | क्योंकि श्वसन मार्ग में सूजन आ जाने के कारण वह संकुचित हो जाती है | इस कारण छोटी-छोटी सांस लेनी पड़ती है | छाती में कसाव जैसा महसूस होता है और सास फूलने लगती है और बार-बार खांसी आती है | इस बीमारी के होने का विशेष उम्र बंधन नहीं होता है | किसी भी उम्र में कभी भी यह बीमारी हो सकता है | दमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन इस पर नियंत्रण जरुर किया जा सकता है | दम (अस्थमा ) से पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन व्यतीत कर सके | अस्थमा तब तक ही नियंत्रण में रहता है जब तक मरीज जरुरी सावधानियां बरत रहा है |

             अस्थमा एक गंभीर बीमारी है जो श्वास नलिकाओं को प्रभावित करती है | श्वास नलिकाएं फेफड़े से हवा को अंदर-बाहर करती हैं अस्थमा होने पर इन नलिकाओं की भीतरी दिवार में सुजन होता है | यह सुजन नलिकाओं को बेहद संवेदनशील बना देता है और किसी भी बेचैन करनेवाली चीज के स्पर्श से यह प्रतिक्रिया करता है | जब नलिकाएं प्रतिक्रिया करती हैं तो उनमें संकुचन होता है और उस स्थिति में फेफड़े में हवा की कम मात्रा जाता है | इससे खांसी, नाक बजना छाती का कड़ा होना रात और सुबह में सांस लेने में तफलीफ आदि है और  लक्षण पैदा होते हैं | अस्थमा एक अथवा एक से अधिक पदार्थो के प्रति शारीरिक प्रणाली की अस्वीकृति है | अस्थमा के कारण - अस्थमा का एटैक आने के बहुत सारे कारणों में वायु का प्रदुषण भी एक कारण है | अस्थमा के अटैक के दौरान वायु मार्ग के आसपास के मसल्स में कसाव और वायु मार्ग  में सुजन आ जाता है | जिसके कारण हवा का आवागमन अच्छी तरह से नहीं हो पाती है | दमा के रोगी को साँस लेने से ज्यादा साँस छोड़ने में मुश्किल होती है | एलर्जी के कारण श्वसनी में बलगम पैदा हो जाता है जो कष्ट को और भी बढ़ा देता है | एलर्जी के अलावा भी दमा होने के बहुत से कारणों में से कुछ इस प्रकार है १. घर के धुल भरा वातावरण और घर के पालतू जानवर बाहर का वायु प्रदुषण आदि है | २. धुम्रपान अधिक मात्रा में शराब पीना और व्यक्ति विशेष का कुछ खाद-पदार्थो से एलर्जी महिलाओं में हार्मोनल बदलाव कुछ विशेष प्रकार के दवाएं | ३. सर्दी के मौसम में ज्यादा ठंड एलर्जी के बिना भी दमा का रोग शुरू हो सकता है | सिर भारी - भारी जैसा लगता है | जोर-जोर से साँस लेने के कारण थकावट महसूस होती है |

दमा के रोगी के लिए घरेलु उपचार :-

  • दमा रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन नींबू तथा शहद को पानी में मिलाकर पीना चाहिए और फिर उपवास रखना चाहिए | इसके बाद १ सप्ताह तक फलों का रस या हरी सब्जियों का रस तथा सूप पीकर उपवास रखना चाहिए | फिर इसके बाद २ सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए | इसके बाद साधारण भोजन करना चाहिए |
  • दमा रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में जल्दी ही भोजन करके सो जाना चाहिए तथा रात को सोने से पहले गर्म पानी को पीकर सोना चाहिए तथा अजवायन के पानी की भाप लेनी चाहिए | इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है | दमा रोग ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार कई प्रकार के आसन भी है जिनको करने से दमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है | यह आसन इस प्रकार है योगमुद्रासन, मकरासन, शलभासन, अश्वस्थासन, ताड़ासन, उत्तान, कुर्मासन, तथा भुजांगासन आदि |
  • जैसा की पहले ही बताया जा चूका है की दमा का कोई इलाज नहीं होता है | लेकिन दवा या कुछ घरेलु उपायों के द्वारा इसके कष्ट को कम किया जा सकता है | एक लीटर पानी में डॉन बड़ा चम्मच मेथी के दाने डालकर आधा घंटे तक उबालें, उसके बाद इसको छान लें | दो बड़े चम्मच अदरक का पेस्ट एक छलनी में डालकर उस रस निकाल कर मेथी के पानी में डालें | उसके बाद एक चम्मच शुद्र शहद इस मिश्रण में डालकर अछि तरह से मिला लें | दमा के रोगी को यह मिश्रण प्रतिदिन सुबह पीना चाहिए | 
  • मौसम में ठंड के कारण दमा का रोग भयंकर रूप धारण करता है | इसलिए इस समय इन घरेलु उपचारों के सहायता से दमा रोग के कष्ट को तो कुछ हद तक काबू में किया जा सकता है साथ ही कुछ बातों पर ध्यान से दमा रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है | १. इन्हेलर को अपने पास रखें २. घर को हमेशा साफ़ रखे ताकि धुल से एलर्जी की संभावना न हो ३. मुँह से साँस न ले क्योंकि मुँह से साँस लेने पर ठंड भीतर चला जाता है जो रोग को बढ़ने में मदद करता है |
  • दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेट को साफ़ रखना चाहिए तथा कब्ज नहीं होने देना चाहिए | धुम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ नहीं रहना तथा धुम्रपान भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इस रोग का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है | 
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Saturday, December 24, 2016

क्रिसमस 25 दिसंबर को क्यों मनाते हैं ?

क्रिसमस :

         क्रिसमस का त्योहार प्रतिवर्ष अंग्रेजी महीने के अनुसार दिसंबर की 25 तारीख को मनाया जाता है | प्रभु ईसा मसीह का जन्म इसी सुभ तिथि में हुआ था | ईसा मसीह ऊँच- नीच के भेदभाव को नहीं मनाते थे | अत: क्रिसमस का पावन पर्व भी किसी एक का नहीं अपितु उन सभी का है जो उनके समर्थक हैं तथा उन पर आस्था रखते हैं | हालांकि क्रिसमस को ईसा मसीह के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है लेकिन ईसाई विद्वान इस बात पर लगभग एकमत हैं की ईसा के जन्म का वास्तविक दिन यह नहीं है | प्रभु यीशु के जन्मदिन के मौके पर आज भारत समेत पूरी दुनिया में क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है |


         इस त्योहार पर क्रिसमस-ट्री सजाने का विशेष महत्व है | यूरोपीय देशों में तो इसकी सजावट व भव्यता देखते ही बनती है | भारत में भी इसके महत्व को अब विस्तृत रूप से देखा जा सकता है | परिवार के सभी सदस्य इस दिन क्रिसमस ट्री के चारों और एकत्रित होते हैं | सभी मिलकर प्रभु ईसा समीह का स्तुतिगान तथा प्रार्थना करते है | 24 दिसंबर की रात से ही नवयुवकों की टोली जिन्हें कैरल्स कहा जाता है यीशु मसीह के जन्म संबंधी गीतों को प्रत्येक मसीही के घर में जाकर गाते हैं | इसी रात को गिरिजाघरों में प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित झांकियां भी सजाई जाती है | इस अवसर पर ईसाई धर्मावलंबी बड़ी संख्या में गिरजाघरों में एकत्रित होकर एक-दुसरे को प्रभु के जन्म की बधाई देते हैं | रात में से ही हैप्पी क्रिसमस-मेरी क्रिसमस से बधाइयों का सिलसिला जारी है | देश के सभी शहरों में लोगों ने क्रिसमस ट्री सजाया जाता है और सांता दूसरों को उपहार देकर जीवन में देने का सुख हासिल करने का संदेश दे रहे हैं | इस अवसर पर ईसाई अपने घरों को बहुत ही आकर्षक ढंग से सजाते है और विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर पड़ोसियों को भेंट करते हैं तथा खुद भी खाते हैं | बच्चों के लिए शंताक्लाज कोई न कोई उपहार अवश्य लाता है क्योंकि ईसा मसीह स्वयं बच्चों से बहुत स्नेह रखते थे | क्रिसमस ईसाइयों का प्रमुख त्योहार है | ईसाई समुदाय के लिए इस त्योहार का वही महत्व है जो हिंदुओं के लिए दशरह तथा दीपावली का है | यह त्योहार विश्वभर में फैले ईसा मसीह के करोड़ों अनुयायियों के लिए पवित्रता का संदेश लाता है तथा उनके बताए हुए मार्गो व उच्च आदर्शो पर चलने हेतु प्रेरित करता है |

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क्रिसमस का त्योहार भारत में सभी समुदायों आनंद उठाने लगे है जिससे सामाजिक सदभाव की अभिवृदधि होती है | सभी समुदायों के लोग एक-दुसरे को क्रिसमस की सुभकामनाएँ देते हैं | ईसा मसीह को परमेश्वर का दूत माना जाता है | वे संसार के दिन-दुनियों का दु:ख दूर करने तथा ईश्वर के वास्तविक स्वरुप को दूसरों के समक्ष प्रकट करने हेतु अवतरित हुए थे | प्रारंभ में उन्हें अनेक कठिनाइयाँ आई परंतु बाद में धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी | उन्हेंने अपने उपदेशों के माध्यम से संसार में व्याप्त अंधविश्वास, अज्ञानता, दुःख आदि को दूर करने का प्रयास किया | यह त्योहार सभी हदयों को पवित्रता के भाव से ओत-प्रोत करता है और हमें प्रेरित करता है कि अनेक कठिनाइयों का सामना करने पर भी हमें सन्मार्ग का त्याग नहीं करना चाहिए तथा दुसरों को भी पवित्रता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए यथासंभव सहयोग करना चाहिए |

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Sunday, December 18, 2016

सौ वे आर्टिकल की जानकारी कैसी है ?

 सौ वे आर्टिकल  :

      सभी मित्र को बताते हुए हेल्थ के बारे में 100 वे आर्टिकल जंगलटिप्स ब्लोग में लिखा हुवा है |यह आर्टिकल की अधिक जानकारी निचे दिया हुवा है ।





    सभी को जंगलटिप्स ब्लॉग के बारे में पढ़ने वाले भाइयो तथा बहेनो को जंगलटिप्स  की तरफ से सौ वे आर्टिकल की तरफ से हार्दिक सुभकामनाएँ | और अधिक हेल्थ जानकारी के बारे में पढना है तो गूगल पे टाइप (visit) करो www.jangaltips.blogspot.in या यह लिंक पे क्लिक कर सकते है | Click: http://jangaltips.blogspot.com/2016/12/blog-post_18.html
    जंगलटिप्स में जुड़ने के लिए आपका हार्दिक सुभ कामनाएँ | अगर आपकी E-mai ID हमें दे दीजिए आपके emai पर हर आर्टिकल जब नया हम शेयर करेगे तो आपके emai पर भेज सकते है | हमारी E-mai ID है यह jangaltipsin2015@gmail.com मित्रो आपकी E-mai ID इस पर भेज सकते है | jangaltipsin2015@gmail.com पर आर्टिकल में हमारी लिखने में गलती हुए है तो हमें माफ़ करे धन्यवाद | 


  सौ वे आर्टिकल बहुत बहुत सभी को सुभकामनाएँ 

Saturday, December 10, 2016

ठंड में बुजुर्गो और नवजात शिशु को देखभाल कैसे करे !

बुजुर्गो और नवजात शिशु :

          सर्दिया शुरू हो गई हैं मौसम के बदलने का सबसे ज्यादा छोटे बच्चों पर असर पड़ता है | सर्दी जुकाम और गले में इंफेक्शन छोटे बच्चों को ये परेशानियां सबसे ज्यादा होती है | और कई बार तो हल्का बुखार बढ़कर निमोनिया का रूप ले लेता है | ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरुरी होता है | मौसम में हर उम्र के लोगों को देखभाल की आवश्यकता होती है लेकिन बच्चों और बुजुर्गो को ऐसे मौसम में खास देखभाल की आवश्यकता होती है | क्योंकि उनकी प्रतिरोधी क्षमता कमजोर होती है | ऐसे में सबसे ज्यादा डर उच्च रक्तचाप या ब्लड प्रेशर के मरीजों को रहता है | आइये जानें अधिक उम्र या नवजात शिशु का ख्याल कैसे रखनी चाहिए |


          यह बात हम सभी जानते है की दुनिया में सबसे अनमोल रिश्ता माँ और शिशु का होता है | यह रिश्ता प्रेम और स्नेह का प्रतिक होता है | और ऐसा हो भी क्यों ना 9 महिना तक कोख में पालने और असहनीय प्रसव पीड़ा सहने के बाद माँ के गोद में बच्चे की किलकारियां गूंजती है | इससे ना केवल माँ की बल्कि पुरे परिवार की ख़ुशी दोगुनी हो जाती है | जब भी कोई स्त्री पहली बार माँ बनती है तो खुशियों के साथ साथ उसके सामने कई तरह की चुनौती भी होती है | पहली बार शिशु को जन्म देने वाली माताओं को यह पता नहीं होता की उन्हें अपने बच्चे की देखभाल कैसे करनी है | क्योंकि यह उसके लिए बिलकुल नया अनुभव होता है | बच्चों की देखभाल को लेकर नयी माँ के दिमाग में कई प्रकार की शंकाएं या सवाल उत्सुकता होती है | मौसम बदलने का सीधा असर उन पर पड़ता है उनमे से बुजुर्ग तो अपनी तकलीफ बता व समझा कर निदान कर सकते है पर छोटे बच्चे के लिए यह बिलकुल मुश्किल है | ऐसे में छोटे बच्चों की ठंड में बेहतर देखभाल की जरुरत होती है | विशेषज्ञ बताते हैं की अचानक मौसम परिवर्तन का असर सभी पर होता और इससे छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते है | सर्दी जुकाम और गले में इन्फेक्शन के अलावा छोटे बच्चों को परेशानियाँ सबसे ज्यादा होती है |

नवजात बच्चों की देखभाल कैसे करे-

          नवजात शिशु के लिए उसकी माँ का दूध ही सर्वोत्तम होता है | इसलिए माँ को बच्चे को तब तक दूध पिलाना चाहिए जब तक बच्चा पूरी तरह से संतुष्ट न हो जाए | बच्चे को उठाते समय एक हाथ को सर और गर्दन के निचे और दूसरे हाथ को पैर के निचे रखें | बच्चे के सिर और गर्दन को इस तरह पकडे की इन्हें पूरा सपोर्ट मिले | नवजात को हमेशा नर्म और गर्म कपडे में लपेटकर रखना चाहिए | इससे आपका बच्चा काफी सुरक्षित महसूस करता है | बच्चे को वातावरण के बदलाव का ज्यादा असर ना पड़े इसके लिए 0-2 महिना तक शिशु को जरुर लपेटकर रखनी चाहिए | बच्चों की मालिश करने से उनका शारीरिक विकाश होता है | लेकिन बच्चे की मालिश सावधानीपूर्ण की जानी चाहिए | मालिश के लिए जैतून, बादाम या बेबी ऑइल इस्तेमाल कर सकते है | लेकिन मालिश को हमेशा हलके हाथो से करनी चाहिए |

  • बाहर ज्यादा ठंड होने पर बच्चों को इनडोर गेम्स खेलने को प्रेरित करनी चाहिए | बच्चों में ज्यादा दिन तक रहने वाला सर्दी जुकाम निमोनिया भी हो सकता है | शिशु के सर व पैर हमेशा ढक कर रखना चाहिए 
  • नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधी क्षमता बनाये रखने के लिए उसे स्तनपान कराना चाहिए | अपने शिशु का टीकाकरण समय पर करायें जिससे वो कई संक्रामक बिमारियों के खतरे से दूर रहे | 
  • अपने चिकित्सक से समय-समय पर मिलते रहे | समय-समय पर ब्लड प्रेशर नापते रहें और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखे | सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने का एक कारण होता है रक्त वाहिकाओं का संकुचित हो जाना जिससे हदय पर दबाव पड़ता है |
  • सरदर्द, घबराहट, आँखों में भारीपन महसूस होने पर चिकित्सक से मिले | खाने में तेल, घी कम से कम खाये और रोज व्यायाम करना चाहिए |
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