गर्भावस्था :
गर्भकाल एक महिला के लिए सबसे जटिल समय होती है | एक और उनके खान-पन, आचार व्यवहार पर विशेष ध्यान देना होता है, वहीँ दूसरी और उन्हें अपनी शारीरिक फिटनेश पर भी पर्याप्त ध्यान देना चाहिए | इसमें लापरवाही बरतने पर गर्भिणी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कमर दर्द पेडू में दर्द चक्कर आना उलटी आना और कभी-कभी रक्तस्त्राव होना |
गर्भकाल में महिला को कमर दर्द :
माताएँ यह बात अच्छी तरह से जानती हैं की गर्भकाल में अक्सर माता का वजन दस-बार किलो के लगभग बढ़ जाता हैं | इसके परिणामस्वरूप गर्भिणी को झुककर चलने की आदत सी पड जाती है | इसके रीढ़ की हड्डी एव कमर की माँसमेशियों पर जोर पड़ता है, जिसके कारण कमर में दर्द होने लगता है | अकसर काम करते रहने से महिलाएं थक जाती है, अंत झुककर चलने लगती है | फिर वह निरंतर ऐसा करती है | गर्भावस्था में प्रोजेस्टरोंन नामक हार्मोन बनता है, जो शरीर एवं जोड़ों को लचीला बनाता है | इससेकमर के किसी भी जोड़ में आसानी से लचक आ जाती है, जो कमर के दर्द को जन्म देती है | गर्भावस्था के दौरान आहार में कैल्शियम की कमी से भी कमर दर्द हो सकता है |
गर्भकाल एक महिला के लिए सबसे जटिल समय होती है | एक और उनके खान-पन, आचार व्यवहार पर विशेष ध्यान देना होता है, वहीँ दूसरी और उन्हें अपनी शारीरिक फिटनेश पर भी पर्याप्त ध्यान देना चाहिए | इसमें लापरवाही बरतने पर गर्भिणी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कमर दर्द पेडू में दर्द चक्कर आना उलटी आना और कभी-कभी रक्तस्त्राव होना |
गर्भकाल में महिला को कमर दर्द :
माताएँ यह बात अच्छी तरह से जानती हैं की गर्भकाल में अक्सर माता का वजन दस-बार किलो के लगभग बढ़ जाता हैं | इसके परिणामस्वरूप गर्भिणी को झुककर चलने की आदत सी पड जाती है | इसके रीढ़ की हड्डी एव कमर की माँसमेशियों पर जोर पड़ता है, जिसके कारण कमर में दर्द होने लगता है | अकसर काम करते रहने से महिलाएं थक जाती है, अंत झुककर चलने लगती है | फिर वह निरंतर ऐसा करती है | गर्भावस्था में प्रोजेस्टरोंन नामक हार्मोन बनता है, जो शरीर एवं जोड़ों को लचीला बनाता है | इससेकमर के किसी भी जोड़ में आसानी से लचक आ जाती है, जो कमर के दर्द को जन्म देती है | गर्भावस्था के दौरान आहार में कैल्शियम की कमी से भी कमर दर्द हो सकता है |
गर्भावस्था में सावधान कैसे बरतनी चाहिए -
- कमर दर्द से छुटकारा पाने के लिए सर्वप्रथम आहार में कैल्शियम एवं लोहे की प्रचुर मात्रा लें, यानि दूध, केला, सेब, पालक, अंजीर आदि लें | यह सब करने के बावजूद अगर कमर दर्द हो तो डॉक्टर से परामर्श लेकर आगे का इलाज करवाएँ | गर्भावस्था के दौरान निम्न सामान्य बातों को अपनाकर कमर दर्द से मुक्ति पाएँ -
- यदि जमीन पर झुकना पड़े तो कमर के बजाय घुटनों को मोड़ें | आलथी-पालथी मारकर या टांगों को क्रांस करके न बैठें | सोते समय घुटनों को मोड़कर सोएँ |
- बिस्तर से उठते समय पहले बिस्तर के किनारे पर सरककर आ जाएँ | बाद में दोनों पैरो को निचे लटकाकर बिस्तर पर बैठें | उसके बाद पलंग से उतरें |
- खरीदारी करते समय दोनों हाथो में बराबर वजन उठायें | अगर बच्चा गोद में है तो बार-बार उसको अलग-अलग ढंग से गोद में लिताएं |ऊँची एडी में सेंडील कदापि न पहनें |
- बैठते समय कुरसी के पिछले भाग से कमर को सहारा दें अथवा कमर और कुरसी के बिच में तौलिया लपेटकर या गोल तकिया रखकर बैठें | कम ऊंचाई वाले सोफे या मुढे पर न बैठें |
- सीधा खड़े रहने की कोशिश करें | पेट को अंदर की तरफ दबाएँ | चलते समय दोनों पैरों पर समान वजन रखें |
- सबसे अहम् बात तो यह है की गर्भकाल में लेडी डॉक्टर से समय-समय पर बताना अवश्य कराएँ |इस दोरान आयरन तथा कैल्शियम की गोलियाँ लेना न भूलें और थोडा-बहुत घरेलु कार्य जरुर करें |
