गुरदे की पथरी :
यह एक साधारण प्रक्रिया है की शरीर के क्षारीय तत्व पेशाब के साथ बाहर निकलते रहते है । परंतु जब ये शरीर से बाहर नहीं निकल पाते तो वहीँ रुक जाता हैं और धीरे धीरे ज़मने लगता है | इस तरह कुछ समय बाद पथरी का रूप धारण कर लेता है | यह पथरी तीनों दोषों वात,पित्त, कफ के प्रकोप से ही होती है | अधिकतर यह वात, पित्त, कफ तथा वीर्य में अवरोध उत्पन्न होने पर बनने लगती है |
यह एक साधारण प्रक्रिया है की शरीर के क्षारीय तत्व पेशाब के साथ बाहर निकलते रहते है । परंतु जब ये शरीर से बाहर नहीं निकल पाते तो वहीँ रुक जाता हैं और धीरे धीरे ज़मने लगता है | इस तरह कुछ समय बाद पथरी का रूप धारण कर लेता है | यह पथरी तीनों दोषों वात,पित्त, कफ के प्रकोप से ही होती है | अधिकतर यह वात, पित्त, कफ तथा वीर्य में अवरोध उत्पन्न होने पर बनने लगती है |
कारण और सावधान : अधिक मामलों में तो पथरी बनने के कारण क्षारीय तत्वों का शरीर से बाहर न निकल पाना ही होता है | इसके लक्षण होते है 1 मूत्राशय सूज जाता है या फुल जाता है | 2 पेडू के आस पास दर्द होता है या पेशाब कष्ट के साथ आता है | 3 मूत्र में बकरे के जेशी पेशाब दुर्गध आती है | 4 मूत्र - त्याग करते समय जोर की पीड़ा होती है | पेशाब जोर लगाकर उतरता है और वह भी पीड़ा के साथ बूंद बूंद करके आता है | 5 कभी कभी पेशाब के साथ रक्त भी आता है | पेडू में अत्यंत जलन और भयंकर वेदना होती है | पथरी का रंग लाल, काला, पिला, नीला अथवा सफ़ेद होता है | या काटेदार तिकोनी या चपटी आदि कई तरह की और चिकनी होती है |
पथरी के रोगी को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए | पकवान अधिक गरम चीजे, तेज मिर्च मसाले, मांस, मछली, अंडा आदि नहीं खाने चाहिए | तरबूज,ककड़ी, खीरा, मूली, शहद, नारियल पानी आदि का सेवन करना चाहिए | एक विशेष सावधानी जरुर बरतनी चाहिए की वीर्य के आवेग को बिच में न रोकें अदि ऐसा होता है तो यह मूत्राशय में या मुत्र्द्रार में सुखकर अवरोध पैदा करता है और फिर पथरी को जन्म देता है |
घरेलु इलाज से पथरी को निकाल पाना संभव है |
पथरी के रोगी को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए | पकवान अधिक गरम चीजे, तेज मिर्च मसाले, मांस, मछली, अंडा आदि नहीं खाने चाहिए | तरबूज,ककड़ी, खीरा, मूली, शहद, नारियल पानी आदि का सेवन करना चाहिए | एक विशेष सावधानी जरुर बरतनी चाहिए की वीर्य के आवेग को बिच में न रोकें अदि ऐसा होता है तो यह मूत्राशय में या मुत्र्द्रार में सुखकर अवरोध पैदा करता है और फिर पथरी को जन्म देता है |
घरेलु इलाज से पथरी को निकाल पाना संभव है |
- मूली के 30 ग्राम बीज आधा लीटर पानी में उबालें आधा शेष रहने पर छानकर पिएँ | दो सप्ताह के इस्तेमाल से गुरदे की पथरी गलने लगती है |
- बड़ा सा प्याज साफ करके पीसकर उसका रस निकालें कपडे में छानकर एक कप की मात्रा: खाली पेट पिलाएँ | कुछ दिनों के सेवन से अच्छा लाभ मिलेगा |
- पथरी के रोगी पर्याप्त मात्रा में चौलाई का साग अपने भोजन में शामिल करें |
- भोजन में खीर, तरबूज ककड़ी का अधिक सेवन करें या सेंधा नमक डालकर इनका रस पिएँ |पेठे के रस में हिंग तथा कालीमिर्च डालकर प्रात: सेवन किया करें |
- दो टोला हल्दी तथा 350 ग्राम गुड़ मिलाएँ | इसमें से आधा चम्मच रोज कांजी के साथ सेवन करें |
- रात के 15 ग्राम गेहू 250 मि.ली. पानी में भिगो दें, प्रात: उसे छानकर मिश्री मिलकर सेवन करें | जलन और दाह शांत रहेंगे |
- गाजर के बीज दो चम्मच की मात्रा में एक गिलास पानी में उबालकर चीनी या खांड मिलाकर पिएँ | इससे पेशाब ज्यादा खुलकर आएगा |
- गाजर का नित्य सेवन करने से यह गुरदे की पथरी को तोड़कर निकाल देता है |
- गन्ने का रस भी अधिक पेशाब लाता है, इससे पेडू की जलन और दाह शांत होते हैं |
