डेंगू बुखार :
डेंगू बुखार एक खतरनाक बीमारी है | पिछले कुछ वर्षो में डेंगू के मामलों में काफी तेजी से वृद्री हुई है | प्राय: बरसात के बाद तो डेंगू का प्रकोप अत्यधिक बढ़ जाता है |
डेंगू बुखार एक वायरल संक्रमण है, जो कि एडिस मच्छर के काटने से होता है | एडिस मच्छर हमारे घरों के आसपास खड़े पानी पर ही पनपता है इस बीमारी से सिर, आँख, कमर और हाथ पैरों में अधिक दर्द होता है | ऐसा लगता है जैसे हड्डियाँ टूट रही हैं | इसी कारण इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है | डेंगू ज्वर की शुरुआत अचानक होती है और कुछ ही घंटो में तापक्रम 105 अंश तक पहुँच जाता है | तीसरे दिन ज्वर कम होकर पांचवे दिन फिर बढ़कर सातवें दिन तक उतर जाता है |
लक्षण का उपचार :
डेंगू बुखार एक खतरनाक बीमारी है | पिछले कुछ वर्षो में डेंगू के मामलों में काफी तेजी से वृद्री हुई है | प्राय: बरसात के बाद तो डेंगू का प्रकोप अत्यधिक बढ़ जाता है |
डेंगू बुखार एक वायरल संक्रमण है, जो कि एडिस मच्छर के काटने से होता है | एडिस मच्छर हमारे घरों के आसपास खड़े पानी पर ही पनपता है इस बीमारी से सिर, आँख, कमर और हाथ पैरों में अधिक दर्द होता है | ऐसा लगता है जैसे हड्डियाँ टूट रही हैं | इसी कारण इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है | डेंगू ज्वर की शुरुआत अचानक होती है और कुछ ही घंटो में तापक्रम 105 अंश तक पहुँच जाता है | तीसरे दिन ज्वर कम होकर पांचवे दिन फिर बढ़कर सातवें दिन तक उतर जाता है |
लक्षण का उपचार :
- सिर में बहुत तेज दर्द तथा आँखों में दर्द |
- उलटी आना. नकसीर फूटना और हिमोग्लोबिन के स्तर में वृद्धी |
- नाक, मसूड़ों, गुदा व मूत्र नलिका से खून आना |
- रक्त प्लेटलेट (बिंबाणुओं) की संख्या में भारी गिरावट |
- त्वचा विशेषकर छाती पर लाल-लाल दाने उभर आना |
- मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द | डेंगू का वायरल शरीर में घुसने के बाद सीधे शरीर के प्रतिरोधी तंत्र पर हमला करता है | रोगी को मुलायम बिस्तर पर लिटाकर आराम देना चाहिए | इस रोग में आराम ही ओषधि है भूख खूब लगती हो तो ज्वर की हालत में दूध, साबूदाना, चाय, मौसमी, बेदाना, अनार, ताजे, किशमिश आदि चीजें खाने को देनी चाहिए |
- शारीरिक एवं मानसिक किसी भी प्रकार की मेहनत, स्नान, स्त्री प्रसंग आदि से बचना चाहिए |
- रोगी को गिलोय, अदरक, तुलसी, इलायची का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पिलाएँ | तरल पधार्थ अधिक से अधिक पिलाएँ |
- नीबू,अदरक की चाय दिन में दो बार पिलाएं | इससे रोगी को बड़ा आराम मिलेगा |
- सुवर्ण नारदिप लक्ष्मीविलास रस की एक गोली सुबह-शाम ले सकते हैं |
- जब बुखार उतर जाए तब रोगी को शक्तिप्रद, बलवर्द्रक तथा पौष्टिक आहार दें, जिससे उसकी शारीरिक कमजोरी जल्दी दूर हो |
- रोगी को तिन दिन प्रात: नीम की ताजा कलियों का रस एक कप तथा पांच कलि मिर्च का पाउडर एक दो बताशा घोकर पिला दें | रोगी जल्दी स्वस्थ हो जायेगा |
- डेंगू बुखार में अकसर प्लेटलेट कम हो जाते हैं | अत: बुखार की दवा के साथ- साथ गिलोय, तुलसी काढ़ा तथा पपीते के पत्तों का रस देने से रोगी जल्दी ठीक होता है | रोगी को अधिक मात्रा में पानी तथा तरल पदार्थ दें, रोटी न दें, पतला दलीय तथा खिचड़ी भोजन में दें तो रोगी तिन-चार दिन में चंगा हो जाता है | स्वस्थ होने के लिए कम से कम 1.5 लाख प्लेटलेट होने चाहिए |
