स्वाइन फ़्लू :
स्वाइन फ़्लू यानि इन्फ्लुएंजा वायरस ने विकराल रूप धारण कर लिया है । यह दूसरा मौका है, जब इन्फ्लुएंजा वायरस के संक्रमण को वैशिवक महामारी घोषित किया गया है । चार दशक पहले, संभवत सन 1968 में हांगकांग में इस वायरल के संक्रमण से करीब दस लाख लोगों की मौत हुई थी । अब इससे विकराल रूप को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे विश्वव्यापी महामारी घोषित किया है ।
स्वाइन इन्फ्लुएंजा वायरल मुख्य रूप से सूअर को संक्रमित करता है । उसे वाहक बनाकर आज यह पूरी दुनिया में फ़ैल चूका है । यह एक सूअर से दुसरे सूअर में फैलता है । सूअर आदमी में फैलता है । यह एक मनुष्य से दुसरे मनुष्य में फैलता है । एक देश के मनुष्य से जब दुसरे देश का मनुष्य संपर्क में आता है, तो इसका प्रसार दुसरे देश में भी हो जाता है । इस तरह मनुष्यों के लगातार संपर्क से यह महामारी का रूप धारण कर लेता है ।
लक्षण : यह कई प्रकार का होता है, परन्तु विशेषग्नो का मनना है की एच 1 एन 1 वायरल सूअर और आदमी में सामान्य रूप से पाया जाता है । इससे अलावा एच 3 एन 2 वायरल के लक्षण भी देखे जाते है । इस रोग के लक्षण सामान्य फ़्लू की तरह ही होते हैं ।
चिकित्सकों एवं रोग विशेषज्ञ का मानना है कि स्वाइन फ़्लू वायरल का असर सप्ताह भर तक रहता है, कुछ रोगियों में तिन-चार दिन तक ही रहकर स्वत: चला जाता है । दवाइयों की अपेक्षा सावधानी और बचाव ही इसका अच्छा इलाज है । फिर भी कुछ नुस्खे प्रयोग में ला सकते हैं ।
स्वाइन फ़्लू यानि इन्फ्लुएंजा वायरस ने विकराल रूप धारण कर लिया है । यह दूसरा मौका है, जब इन्फ्लुएंजा वायरस के संक्रमण को वैशिवक महामारी घोषित किया गया है । चार दशक पहले, संभवत सन 1968 में हांगकांग में इस वायरल के संक्रमण से करीब दस लाख लोगों की मौत हुई थी । अब इससे विकराल रूप को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे विश्वव्यापी महामारी घोषित किया है ।
लक्षण : यह कई प्रकार का होता है, परन्तु विशेषग्नो का मनना है की एच 1 एन 1 वायरल सूअर और आदमी में सामान्य रूप से पाया जाता है । इससे अलावा एच 3 एन 2 वायरल के लक्षण भी देखे जाते है । इस रोग के लक्षण सामान्य फ़्लू की तरह ही होते हैं ।
- तेज बुखार आना और गले में खराश या खिचखिच होना सिर दर्द के साथ बदन में दर्द ।
- उल्टी और डायरिया की शिकायत होना या ज्यादा थकावट महसूस करना
- मलेरिया से ग्रस्त होना और श्वास फूलना, साँस लेने में तकलीफ, त्वचा का रंग हलका या भूरा दिखना ।
- आलस छाया रहना, शरीर में पानी की कमी, भूख न लगना बेचेनी महसूस होना ।
- बुखार- खासी एक सप्ताह से ज्यादा समय तक बने रहना ।
चिकित्सकों एवं रोग विशेषज्ञ का मानना है कि स्वाइन फ़्लू वायरल का असर सप्ताह भर तक रहता है, कुछ रोगियों में तिन-चार दिन तक ही रहकर स्वत: चला जाता है । दवाइयों की अपेक्षा सावधानी और बचाव ही इसका अच्छा इलाज है । फिर भी कुछ नुस्खे प्रयोग में ला सकते हैं ।
- पीड़ित व्यक्ति को गरम पानी में नमक या फिटकरी डालकर गरारे कराएँ । रोगी खूब पानी पिए ।
- रोगी को नीम की पत्तियाँ ताजा (८-१०) काली मिर्च, लोंग, अदरक या सोंठ तथा गुड का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पिलाएँ । इससे बहुत आराम मिलेगा । रोगी को पर्याप्त प्रोटीन युक्त भोजन दें ।
- गिलोय का एक फुट का टुकड़ा कुचलकर पानी में भिगो दें । इसमें तुलसी दल इलायची, लौंग तथा काली मिर्च डालकर काढ़ा बनाएँ, चार पांच दिन पिलाए । चमतकारी लाभ होगा । यह प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है ।
- दवा के रूप में संजीवनी वटी सुन्दर्शन घन वटी, मृत्युंजय रस तथा शितोत्पलादी चूर्ण का सुबह - शाम सेवन कराएँ । ये दवाइयों देसी दवाखाने पर आसानी से मिल जाती है ।
- ठंडी चीजें, फ्रिज का पानी, आइसक्रीम, चावल दही आदि का सेवन न करें ।
