Thursday, February 11, 2016

जीवनभर पेट के रोगो से बचे रहें : भोजन से जुडिहुवी यह नियम

जीवनभर पेट के रोगो से बचे रहें :

        जादातर लोग सच्चा भोजन विधि जानते नहीं । खोटे विधि के खोटे प्रमाण में अर्थात जरूर से जादा या कम भोजन करने से जठराग्नि मन्द पड जाता है । उससे कबजियात लगता रहता है । तभी आतरड़े में जमा हुवा मड सड़के  रस बन्ने लगता है | पुरे शरीर में फेल जाता और उसका रोग उत्तपन हो जाता है | इस कारण आज हम भोजन के नियमो बताते है |  




  •  पहले तो भोजन के प्रारंभ में नमक और अद्रक्ष का सेवन करने से पाचन क्रिया अच्छा रहता है उसी वजसे जीभ ओर गला भी साफ़ रहता है | दूसरा जब भोजन करते समय चलते -चलते, बोलते - बोलते या हसते भोजन नहीं करना है |
  •  गरम भोजन करने से पाचन अग्नि तेज होती है | और खोराक जल्दी हजम होता है, शरीर में वायु ओर कफ दूर हो जाता है | भोजन सात्विक होना चाहिएँ | भोजन बनाने के बाद ३-४ घंटे में खाना है | 
  • स्वादिष्ट अन्न मन्ने प्रसन करता है | बल और उत्साह बढ़ जाता है | आयुश्यनी वृधि विपरीत असर होता है | सुबह में पेट भरके भोजन नहीं करना है, हल्का नास्ता करना चाहिएँ |
  •  माप से जादा खानेसे पेट फुल जाता है और पेट में से अवाज आता है | आलस लग जाता है, शरीर भारी लगता है माप से कम खानेसे शरीर दुबला हो जाता है और शक्ति का क्षय होता है |
  • समय बिना भोजन करने से शक्ति का नाश होता है | शरीर अशक्त बन जाती है, सिर दर्द और अजीर्ण अलग- अलग रोग होता है | खाना हजम नहीं होता है | भूख से कम ही खाना है, और पानी भी थोडा कम ही पीना है इर कारण पेट जल्दी हजम हो जाता है |
  • भोजन के पहले पानी पिने से पाचन शक्ति कमजोर हो जाता है, शरीर दुर्बल होता है और खाना खाने के बाद तुरंत पानी न पीना  तुरंत पिने से आलस आता है | थोडा थोड़ा पानी पि सकते और भोजन के बाद छाश पिने से आरोग्य है | इसे मनुष्य को बडहिन ओर आरोग्यहिन न होता है |  
  • जब भी प्याश लगी हो तभी भोजन नहीं करना तब पानी ही पीना है | और जब भूख लगा हो तभी पानी न पीना है तभी खाना ही खाना है | प्याश लगी तब खाना  और भूख लगे तब पानी पीना से आतरड़े को रोग हो जाता है |

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