योगासन के विधि :
सर्वागासन यह आसन पर सिधे लेटें । श्वास को बाहर निकालकर अर्थात् रेचक करके हाथों पर दबाव देते हुए 45 अंश कोण तक टांगें उठाएँ, कुछ क्षण रुककर 60 अंश तक ले जाएँ । फिर पीठ का भाग भी ऊपर उठायें, दोनों हाथों को कमर को आधार दें | हाथ की कुहनियाँ भूमि से लगी रहें | गर्दन और कंधे के बल पूरा शरीर ऊपर की ओर सीधा खड़ा कर दें | ठोड़ी छाती के साथ चिपक जाये, दोनों पैर आकाश की ओर रहें, दृष्टी दोनों पैरों के अंगूठों की ओर रहे | श्वास निकालकर श्वास को दीर्ध, सामान्य चलने दे | इस आसन को धीरे धीरे अभ्यास बढ़ाते हुए १० मिनट तक कर सकते हैं | अभ्यास होने पर हाथों को जमीन पर लिटाकर टाँगों को सीधा रखें | बाजुओं को ऊपर उठाकर हाथों को जंघाओं के पास रखें और केवल कंधों पर सीधा रहें | वापस आते हुए भी कोई झटका नहीं लगे | पहले अपनी टाँगो को भूमी के सामानांतर करे फिर पीठ को लगाते हुए ९० अंश तक लाएँ और फिर पाँवों को धीरे- धीरे भूमि पर ले आएँ |
सर्वागासन का लाभ -
सर्वागासन का लाभ -
- सर्वागासन से जठराग्नि तेज होती है शरीर में सामर्थ्य बढ़ता है | तीनों दोषों का शमन होता है | वीर्य की ऊध्वर्गति होकर अंत कारण शुद्रा होता है | मेघाशक्ति बढती है | त्वचा लटकती नहीं तथा शरीर में झुर्रियाँ नहीं पड़ती, बाल सफ़ेद होकर गिरते नहीं चिर यौवन की प्राप्ति होती है |
- इस आसन से थाइराइड नामक अन्त: ग्रन्थि की शक्ति बढती है | लीवर और प्लीहा के रोग दूर होते हैं स्मरण शक्ति बढती है | मुख पर से मुहासे एवं अन्य दाग दूर होकर मुख तेजस्वी बनता है | स्वप्नदोष दूर होता है |
- मन्दाग्नि, अजीर्ण, कब्ज, अर्श, थाइराइड का अल्प विकास, अन्गविकार, दमा, कफ, चमड़ी के रोग, रक्तदोष स्त्रियों को मासिक धर्म की अनियमितता एवं दर्द, मासिक न आना अथवा अधिक आना इत्यादि रोगों में इस आसन से लाभ होता है नेत्र और मस्तिष्क की शक्ति बढती है |
