Sunday, February 7, 2016

योगासन के विधि : अर्धमस्त्येन्द्रासन ८

अर्धमस्त्येन्द्रासन :
       अर्धमस्त्येन्द्रासन का दोनों पैरों को लम्बे करके आसन पर बैठ जाओ | बायें पैर को घुटने से मोड़कर एडी गुदाद्रार के निचे जमायें | पैर के तलुवे को दाहिनी जंघा के साथ लगा दें | अब दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर खड़ा कर दें और बाएं पैर की जंघा से ऊपर ले जाते हुए जंघा के पीछे जमीन के ऊपर रख दें | अब बायें हाथ को दाहिने पैर के घुटने से पार करके अर्थात् घुटने को बगल में दबाते हुए बायें हाथ से दाहिने पैर का अंगूठा पकड़ें | घड को दाहिनी ओर मोड़ें जिससे दाहिने पैर के घुटने के ऊपर बायें कंधे का दबाव ठीक से पड़े | अब दाहिना हाथ पीठ के पीछे से घुमाकर बायें पैर की जांघ का निम्न भाग पकड़ें | सिर दाहिनी ओर इतना घुमायें की ठोकी और बायाँ कंधा एक सीधी रेखा में आ जाये | छाती तनी हुई रखें, निचे की और न झुकें |

           इसी प्रकार पहले दाहिना पैर मोड़कर एडी गुदाद्रार के निचे दबाकर दूसरी तरफ का आसन भी करें | प्रारम्भ में ५ सेकेण्ड तक यह आसन करना है |

अर्धमस्त्येन्द्रासन का लाभ -
  • रीढ़ की हड्डियों के साथ उनमें से निकलने वाली नाड़ियों को भी अच्छी कसरत मिलती है | कमर, पीठ और संधिस्थानों के दर्द जल्दी दूर होते हैं |
  • पेट के विभिन्न अंगों को अच्छा लाभ होता है | पीठ, पेट के नले, पैर, गर्दन, हाथ, कमर, नाभि से नीचे के भाग एवं छाती की नाड़ियों को खिंचाव मिलने से उन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है | जठराग्नि तीव्र होती है |
  • विकृत यकृत, प्लीहा तथा निष्क्रिय वृक्क के लिए यह आसन लाभदायी है |  

गर्मी के बाद बारिश का शरीर को क्या लाभ मिलती है |

 बारिश के लाभ :           गर्मी के बाद बारिश बहुत ही सुकून देती है | बारिश का इंतज़ार हर किसी को रहता है | बारिश के पानी का लाभ सभी को ...