Friday, January 15, 2016

पोलियो की रोकथाम : और समाधान

पोलियो : 
         बच्चों में पोलियो विश्वव्यापी बीमारी है | यह बीमारी एक वायरस के द्रारा फेलती है जो बच्चो को अपना शिकार बनाती है | वायरस एक बहुत ही सुक्ष्म जीव होता है | जो इस बीमारी के लिए जिम्मेदार है | यह वायरस एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में अशुद्र भोजन एवं जल के द्रारा फेलता है |

         जब एक बच्चा अशुद्र भोजन या जल का सेवन करता है तो मुँह के द्रारा यह वायरस उसके सरीर में प्रवेश कर जाता है और पेट में तिव्र संख्या में बढ़ता जाता है | फिर ये वायरस पेट की रक्त धमनियों के माध्यम से रीढ़ की हड्डी में प्रवेश कर जाते है, तब ये सरीर की क्रिया को नियंत्रित करने वाली नाड़ियो को विकृत कर देते है और  बच्चा हमेशा के लिए अपंग हो जाता है | 
         पोलियो दो प्रकार का होता है - रीढ़ का पोलियो फेफड़ों को प्रभावित करता है और बच्चे को शरीरिक रूप से अपंग बना देता है | यह ठीक होने में छह दिन से लेकर छह माह तक का समय लेता है | बलवर पोलियो का प्रभाव दिमाग पर पड़ता है | यह गले तथा जीभ को अशक्त कर देता है और श्वसन की पेशियों को प्रभावित करता है | इसे ठीक होने में छह साल का समय लग जाता है | कई केसों में इसके कारण मौत भी हो जाती है | 
           रोकथाम :
  • बच्चों को हमेशा गंदी या धरती पर बार बार गिरी चीज खाने से रोकें | 
  • शिशु को टटटी -पेशाब से खेलते तथा लिथाड़ने से रोकें | अपनी देखरेख में कराकर धोकर स्वच्छ कर देनि चाहिएं |
  • अपने घर के आस पास जहाँ बच्चे खेलते है तथा घर के अंदर आँगन कमरे के फर्श को भली प्रकार साफ सुथरा रखना चाहिएं |
  • बच्चों को टटटी पेशाब के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत डालें | 
  • बच्चों को खिलोने मुँह में न डालने देना | ध्यान न देने पर कई बार बच्चे मुँह से निकली टोंफी फल का टुकड़ा या केला उठाकर मुँह में रख लेते है | इससे भी पोलियो का वायरस बच्चे में प्रवेश कर सकता है समाधान :
  • बच्चो को किसी प्रकार के दुसरे इंजेक्शन आदि न लगवाएँ बल्कि दवाइयों से भी दूर रखें | 
  • बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए एकमात्र उपाय पोलियो वैक्सीन यानी पोलियो का टीका ही है | दस वर्ष से कम आयु के बच्चों को यह वैक्सीन देनी चाहिए |
  • बच्चे को ज्यादा से ज्यादा स्तनपान कराएँ क्योंकि माँ के दूध में पोलियो से बचाने वाले तत्व होते हैं | यह ध्यान रहे की आठ मास से पहले बच्चे को पोलियो प्राय : नहीं होता है | इसका कारण यही की उसके अंदर माँ के दूध द्रारा प्राप्त रोग प्रतिरोधक शक्ति पर्याप्त मात्रा में होती है |
  • सरकार की ओर से देस को पोलियो मुक्त करने के लिए पल्स पोलियो अभियान चलाया जा रहा है | दो बूंद जिंदगी की नाम से यह दवा रविवार को मुक्त पिलाई जाती है | अपने बच्चों को दवा अवश्य पिलवाएं | यह माता पिता का प्रथम कर्तव्य है |                                                                                                          पोलियो विभिन्न नसों एव पेशियों को हनी पहुचता है | पोलियो के आक्रमण के बाद जिन नसों और पेसियो की कम क्षति होती है, वे ठीक हो जाती हैं | जो पेशियाँ मृतप्राय हो जाती है, वे बिलकुल ठीक नहीं हो पातीं इस कारण वह अंग बिलकुल क्रियाहीन हो जाता है |




Tuesday, January 12, 2016

योगासन के विधि : वज्रासन भाग ३

योगासन : वज्रासन 
       वज्रासन में पाचनशक्ति, वीर्य शक्ति तथा स्नायुशक्ति देने वाला होने से यह आसन वज्रासन कहा जाता है | बिछे हुए आसन पर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर दोनों एडिओं पर बैठे जाएँ | पैर के दोनों अंगूठे परस्पर लगे रहें | पैर के तलुवों के ऊपर नितम्ब रहें | कमर और पीठ बिलकुल सीधी रहे, दोनों हाथ को कुहनियों से मोड़े बिना घुटने पर रख दें | हथेलियाँ निचे की और रहें, दृष्टि सामने स्थिर कर दें |


        पाँच मिनट से लेकर १/२ घंटे तक वज्रासन का अभ्यास कर सकते हैं |
वज्रासन के लाभ  : -


  • वज्रासन के अभ्यास से शरीर का मध्य भाग सीधा रहता है | श्वास की गति मंद पड़ने से वायु बढती है | आँखों की ज्योति तेज होती है | वज्रनाडी अर्थात विर्यधारा नाडी मजबूत होती है | वीर्य की उध्र्वगति होने से शरीर वज्र जैसा बनता है |  
  • मन की चंचलता दूर होकर व्यक्ति स्थिर बुद्धिवाला बनता है | शरीर में रक्ताभिसरण ठीक से होकर शरीर निरोगी एवं सुन्दर बनाता है | 
  • भोजन के बाद इस आसन में बैठने से पाचनशक्ति तेज होती है भोजन जल्दी हजम होता है, पेट की वायु का नाश होता है | कब्ज दूर होकर पेट के तमाम रोग नष्ट होते हैं | पोण्डुरोग से मुक्ति मिलती है | रीढ़, कमर, जाँघ, घुटने और पैरो में शक्ति बढती है | कमर और पैर का वायु रोग दूर होता है | स्मरण शक्ति में वृद्धी होती है |
  • स्त्रियों के मासिक धर्म की अनियमितता जैसे अनेकों रोग दूर होते है | शुक्रदोष, विर्यदोश, घुटनों का दर्द आदि का नाश होता है | स्नायु पुष्ट होते हैं | स्फूर्ति बढ़ाने के लिए एवं मानसिक निराशा दूर करने के लिए यह आसन उपयोगी है | ध्यान के लिए भी यह आसन उत्तम है |

Monday, January 11, 2016

मकर संक्रान्ति क्यों मनाते है : संबंधी और पौराणिक

मकर संक्रान्ति : संबंधी और पौराणिक महत्व

           मकर संक्रान्ति साल का पहेला त्यौहार है | इस साल का १४ जनवरी को मकर संक्रान्ति त्यौहार मनाया जाएगा | हमें यह त्योहार अच्छा लगता है | यह त्योहार बहुत से लोग इस त्योहार को मनाने का कारण नहीं जानते है | आज हम आपको बताएँ की य त्योहार क्यों मनाया जाता है | क्यों की यह त्योहार पुरे देश में कैसे मनाया जाता है |


        मकर संक्रान्ति हिन्दुओ का पवित्र त्योहार में से एक है तथा भारत के लगभग सभी भागों में यह त्योहार १४ जनवरी को मकर संक्रान्ति मनाया जाता है | यह एक फसल का त्योहार है | इसे विभिन्न सांस्कृतिक रूपों में बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है | यह त्योहार जो प्रतिवर्ष एक ही तारीख १४ जनवरी को मनाया जाता है | परंतु यह त्योहार कभी कभी १३ जनवरी या १५ जनवरी को भी मनाया जाता है | मकर संक्रान्ति का त्योहार संक्रमणकालीन चरण माना जाता है | जब सूर्य धनु राशी से मकर राशी में प्रवेश करता है | मकर संक्रान्ति स्वयं को आत्मप्रकाशित करने का प्रतिक है | इसे कृतग्नता प्रकट करने के दिवस के रूप में भी जाना जाता है |        मकर संक्रान्ति हिन्दुओ का पवित्र त्योहार में से एक है तथा भारत के लगभग सभी भागों में यह त्योहार १४ जनवरी को मकर संक्रान्ति मनाया जाता है | यह एक फसल का त्योहार है | इसे विभिन्न सांस्कृतिक रूपों में बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है | यह त्योहार जो प्रतिवर्ष एक ही तारीख १४ जनवरी को मनाया जाता है | परंतु यह त्योहार कभी कभी १३ जनवरी या १५ जनवरी को भी मनाया जाता है | मकर संक्रान्ति का त्योहार संक्रमणकालीन चरण माना जाता है | जब सूर्य धनु राशी से मकर राशी में प्रवेश करता है | मकर संक्रान्ति स्वयं को आत्मप्रकाशित करने का प्रतिक है | इसे कृतग्नता प्रकट करने के दिवस के रूप में भी जाना जाता है |

मकर संक्रान्ति का महत्व और पौराणिक का महत्व  :
       मकर संक्रान्ति का महत्व त्योहार इसके नाम में ही छुपा हुआ है | मकर का अर्थ है मकर राशि और संक्रान्ति का अर्थ है संक्रमण | इस दिन सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है | १२ महीने बारह राशियों के लिए हैं | सूर्य के सभी संक्रमणों में से यह संक्रमण जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है, सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है की मकर संक्रान्ति के दिन से दिन थोड़े गर्म और थोड़े बड़े होने लगते हैं फिर धीरे धीरे ठण्ड कम होने लगती है |

  • पुरानों के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि के घर आते हैं जो मकर राशि के घर धनु का स्वामी है | पिता और पुत्र दोनों में कभी नहीं बनती परंतु फिर भी मतभेदों के बावजूत पिता सूर्य पुत्र शनि के घर जाते हैं और वहां एक महिना रहते हैं |
  • मकर संक्रांति के दिन से देवताओं के दिन प्रारंभ होते है | राजस्थान में एक शब्द "मलमास " का प्रयोग किया जाता है, एक ऐसा महिना जब कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते है | मकर संक्रान्ति का दिन मलमास की समाप्ति का प्रतिक है |
  • मकर संक्रान्ति के दिन भगवान विष्णु ने नकारात्मक शक्तियों (असुरों ) को ख़त्म किया था | भगवान विष्णु ने असुरों के सिरों को मंदार पर्वत के निचे दफनाया था | यह दिन नकारात्मक शक्तियों की समाप्ति और नए नैतिक जीवन के प्रारंभ का दिन है |
  • महाभारत में भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था तथा उनहोंने मकर संक्रान्ति के दिन प्राण त्यागने का निर्णय किया | मकर संक्रान्ति के दिन तक बाणों शैय्या पर लेटे रहे | उनकी आत्मा ने इसी दिन उनके शरीर को छोड़ा था | ऐसा माना जाता है की वे लोग जिनकी मृत्यु उत्तरायण के दौरान होती है उन्हें मुक्ति मिलती है अर्थात वे स्थानांतरगमन के चक्र से मुक्त हो जाते हैं |

       

Saturday, January 9, 2016

योगासन के विधि : पदमासन भाग २

योगासन : पदमासन

         इस आसन में फोटो निचे दिया गया है की  पैरों का आधार पर पद्म या अर्थात् कमल जैसा बनने से ये योगासन विधि को पदमासन या कमलासन भी कहा जाता है |


         हम यहापे कैसे आसन करते है उसी विधि को हम बताते है | आसन के उपर बैठ जाये | रेचक करते- करते दाहिने पैर को मोड़कर बाई जंघा पर रखें | यह होने के बाद बाएँ पैर को मोड़कर दाहिनी जंघा पर रखें | पैर के तलुवे ऊपर की और एड़ी नाभि के नीचे रहे, घुटने जमीन से लगे रहने दें | और उनके बाद सर, गर्दन, छाती, आदि पूरा भाग सीधा और तना हुवा रहने दें | और दोनों हाथ दोनों घुटनों के ऊपर ग्नान्मुद्रा में रहें | और बायें हाथ को गोद में रखें | हथेली ऊपर की ओर रहे | उसके ऊपर उसी प्रकार दाहिना हाथ रखें | दरुष्टि को एकाग्र बनायें |

   आसन के लाभ  
  •  अभ्यसपूर्वक यह प्राणायाम के आसन करने से नाड़ीतंत्र शुध्द होकर आसन सिध्द होता है | विशुद्ध नाडी तंत्र वाले योगी के विशुद्ध शरीर में रोग की छाया तक नहीं रह सकती |                                                             
  • उत्साह में वृद्धि होती है, स्वभाव में प्रसन्नता बढ़ती है, मुख तेजस्वी बनता है बुद्धि का अलौकिक विकास होता है |                                                                                                                                                      
  • बौद्धिक मानसिक कार्य करने वालों के लिए चिन्तन मनन करने वालों के लिए एवं के विद्यार्थियों लिए एंव वीर्य रक्षा के लिए यह आसन अद्धितीय है ।                                                                                               
  • मानसिक कार्य करने वालों के लिए, चिंतन-मनन करने वालों के लिए एवं विधार्थियो के लिए यह आसन खूब लाभदायक है | चंचल मन को स्थिर करने के लिए एवं वीर्य रक्षा के लिए यह आसन अद्रीतीय है |


        

Thursday, January 7, 2016

योगासन के विधि : त्रिकोणासन भाग १

योगासन : त्रिकोणासन 
         त्रिकोणासन के विधि सीधे खड़े होकर पैरों के बीच डेढ़ फीट का फासला कर लीजिए | बाएँ हाथ को बाएँ टॉच के साथ रखते हुएँ श्वास छोड़ते हुए निचे की ओर इस प्रकार झुकें क़ि आपकी टॉगें न मुड़ें । हथेली जमीन पर पैर के बाई ओर आ जाए और जमीन को छुए । दाया हाथ ऊपर आसमान की तरफ उठाएँ तथा की हथेली की तरफ ऊपर देखें । फिर धीरे धीरे वापस पहली स्थिति में आ जाएँ । वापस आकर अपने दोनों हाथों को ऊपर निचे खींचे । यही क्रिया बायाँ हाथ ऊपर करके दायीं ओर भी करे ।



        त्रिकोणासन का फायदा ( लाभ ) :-

  • गले के तंतुओं और ग्रंथियो का व्यायाम होता है |                                                                                                                      
  • मेरुदंड की पेशियों और स्नायुओं पर खिंचाव पड़ने से लचक पैदा होती है | कमर को मजबूत होने में सहायता मिलती है |                                                                                                                                        
  • बड़ी ऑत, जिगर तथा तिल्ली पर लाभदायक प्रभाव पड़ता है |

Monday, January 4, 2016

आँख की ज्योति कैसे बढ़ाएँ

 आँख की ज्योति कैसे बढ़ाएँ : 
        आँखों की सुरक्षा के लिए उनकी उचित देखभाल जरूरी है । मल -मूत्र, छींक आदि वेगों को कभी रोकना नहीं चाहिए ।



       
  उपाय : कई अन्य उपाय ऐसे हैं जिनके उपयोग से आँखें स्वस्थ रहती हैं । जैसे मस्तक पर चंदन आँखों के लिए फायदेमंद होता है | मुँह में ठंडा पानी भरकर आँखों  पर पानी के छोटें मारना भी लाभकारी होता है | टहलना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है,परंतु-सुबह हरी घास पर नंगे पैर टहलना आँखों  को विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है,साथ ही प्राकुतीक हरियाली निहारने से आँखों को ठंडक मिलती है |

      १) प्रतिदिन बालों में तेल लगाना,नाक और नाभी में तेल लगाना  आँखों के लिए लाभकारी होता है | इसके लिए नारियल,सरसों या तिल के तेल प्रयोग किया जाना चाहिए |

     २) मक्खन में मिश्री मिलाकर खाने से भी  आँखों को शक्ति मिलती है | रात को सोते समय पैरों के तलवों में तेल लगाना  आँखों के लिए अच्छा होता है |

     ३) भोजन से पहले मल-मूत्र त्याग करना तथा सोते समय हाथ-पैर घोकर सोने से भी  आँखों को रोग मुक्त रखने में मदद मिलती है |

      ४)  आँखों को निरोग रखने में त्रिफला का चूर्ण भी कारगर है | हरड, बहेड़ा  आँखों आँवला मिलकर यह चूर्ण बनाया जाता है | दो चम्मच चूर्ण रात को एक गिलास पानी में भिगोकर सवेरे उस पानी से  आँखों धोने से  आँखों की छोटी-मोटी परेसानी स्वयं ही दूर हो जाती है |
     

Saturday, January 2, 2016

पीठ का दर्द उपचार : कैसे बैठे और कैसे खड़े हों

पीठ का दर्द उपचार : 
         लगभग पीठ का दर्द हर आदमी को जीवन के दौरान कभी न कभी होता है । जिससे वह परेशान रहता है । सच तो यह है कि पीठ दर्द भाग- दौड़ से भरी आधुनिक जीवन शैली का आधुनिक उपहार है । अनजाने में यह हमारे द्वारा बुलाया गया मेहमान है ।


     
       वास्तव में सरीर के इस दर्द की वजह रीढ़ की हड्डी व उससे जुडी मांसपेशियां है जिनमें गलत ढंग से बैठने खड़े होने और लेटने के समय आवश्यकता से अधिक दबाव पड़ने से दर्द होने लगता है ।
       आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद रीढ़ की हड्डीयों का क्षरण शुरू होना जाता है । हड्डियों में केल्शियम और अन्य खनिज पद्धार्थों की कमी से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं । रीढ़ की हड्डी चोट दबाव व् किसी भी प्रकार के कारण तनावग्रस्त होती है उसमे तकलीफ होती है । इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी लंबी बीमारी आदि कुछ कारणों से भी पीठ का दर्द होता है ।

      कैसे बेठना है : 
      ऊँची एड़ी के चप्पल व सेंडिल ज्यादा समय तक नहीं पहनें इससे मांसपेशियों पर आवश्यकता से अधिक दबाव पड़ता है । हमेशा कुर्शी की पीठ से अपनी पीठ सटाकर ही बेठना चाहिए । कुछ भी लिखते पढ़ते समय हमारी गरदन और सिर आगे की ओर झुके होने चाहिए । कुरशी में कभी भी अपने सरीर को तोड़ मरोड़कर नहीं बेठना चाहिए ।
      जमीन से कोई भी वास्तु उठाते समय अपनी पीठ को न झुकाकर हमेशा घुटनो को मोड़कर ही वसतु को उठाना चाहिए । उचाई पर रखी किसी वसतु को उतारने के लिए उचकने की जगह स्टूल आदि का उपयोग करना चाहिए । हमेशा सीधे बैठकर ही भोजन करना चाहिए न की कमर को आगे की और झुकाकर ।
    कैसे खड़ा रहे :
      कभी लगातार खड़े रहना हो तो हमेशा पाँव की स्थिति बदलकर ही खड़े रहना चाहिए । हमेशा मुलायम व् आरामदेह जुते चप्पल व सैंडिल पहनने चाहिए । रात में गहरी नींद में सोना चाहिए । गहरी नींद में सोने से मांसपेशिया को बल मिलता है और खून में हार्मोन की मात्रा बढ़ती है ।
      → पीठ में दर्द लगातार हो तो रात को सोने से पहले पीठ की बैंगन हल्दी से सिकाई करें । फिर रुई रखकर बाँध दें । इससे रीढ़ की हड्डी को गरमाहट मिलेगी और दर्द में राहत महसूस होगी ।
       → रात्रि में नित्य शयन से पूर्व ग्वारपाठा का रस गुनगुना करके मालिश करें तथा आधा कप जूस पी लिया करें भरपूर लाभ होगा ।
      → सोने से पूर्व महानारायण तेल की हलके से मालिस धीरे धीरे करे तथा एक छोटा चम्मच हल्दी दूध या गुनगुने पानी से सेवन चार दिन नियमित करें । ठंडी चीजें चावल दही आइस्क्रीम न खाएँ तथा कूलर ए.सी.पंखा की हवा में न सोएँ ।

गर्मी के बाद बारिश का शरीर को क्या लाभ मिलती है |

 बारिश के लाभ :           गर्मी के बाद बारिश बहुत ही सुकून देती है | बारिश का इंतज़ार हर किसी को रहता है | बारिश के पानी का लाभ सभी को ...